चरण सिंह
इजरायल और ईरान युद्ध विश्व युद्ध में बदल सकता है। जिस तरह से इजरायल के साथ अमेरिका, फ़्रांस, ब्रिटेन खुलकर सामने आ गया है और चीन, रूस, सऊदी अरब ईरान के साथ आ गया है। दुनिया के काफी देश दोनों देशों के समर्थक के रूप में बंट गए हैं। कहना गलत न होगा कि दुनिया में तीसरे विश्वयुद्ध की भूमिका बन गई है।
इजरायल के समर्थक देश
अमेरिका : दरअसल अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा और मजबूत समर्थक है। यह इजरायल को सैन्य सहायता, हथियार, और कूटनीतिक समर्थन प्रदान करता है। हाल के इजरायली हमलों में अमेरिका ने इजरायल की रक्षा के लिए युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका ने हाल के हमलों में प्रत्यक्ष भागीदारी से इनकार किया है।
ब्रिटेन : ब्रिटेन ने इजरायल का समर्थन किया है, विशेष रूप से ईरान के मिसाइल हमलों को नाकाम करने में। ब्रिटिश वायुसेना ने इजरायल की सहायता के लिए अभियान में हिस्सा लिया है।
फ्रांस: फ्रांस ने भी इजरायल के पक्ष में अपनी सेना को तैनात किया है, विशेष रूप से ईरान के हमलों को रोकने के लिए युद्धपोत भेजे गए हैं। हालांकि, फ्रांस ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए संयम बरतने की अपील भी की है। अन्य देश: जर्मनी, स्वीडन, चेक गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, और न्यूजीलैंड ने भी इजरायल का समर्थन किया है।
फ्रांस: फ्रांस ने भी इजरायल के पक्ष में अपनी सेना को तैनात किया है, विशेष रूप से ईरान के हमलों को रोकने के लिए युद्धपोत भेजे गए हैं। हालांकि, फ्रांस ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए संयम बरतने की अपील भी की है। अन्य देश: जर्मनी, स्वीडन, चेक गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, और न्यूजीलैंड ने भी इजरायल का समर्थन किया है।
ईरान के समर्थक देश
रूस : रूस ने खुले तौर पर ईरान का समर्थन किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इजरायल को ईरान पर हमला न करने की चेतावनी दी है, और रूस ने ईरान को हथियारों की आपूर्ति की है, जिसमें ड्रोन और अन्य रक्षा उपकरण शामिल हैं। दोनों देशों के बीच हाल ही में सैन्य और आर्थिक समझौते भी हुए हैं।
चीन : चीन ने भी ईरान का समर्थन करने की घोषणा की है, हालांकि इसकी भागीदारी अधिक कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर है।
अन्य देश/समूह: पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, इराक, ओमान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान, जॉर्डन, हौथी, और हमास ने ईरान का समर्थन किया है। इसके अलावा, उत्तर कोरिया ने भी ईरान को हर संभव मदद की पेशकश की है।
तटस्थ या मध्यस्थ की भूमिका:
संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठन: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और युद्ध विराम की अपील की है। वे क्षेत्र में सैन्य वृद्धि को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दे रहे हैं।
अरब देशों की भूमिका: कुछ अरब देश जैसे जॉर्डन, मिस्र, और ओमान ने कूटनीतिक तौर पर शांति की अपील की है, लेकिन वे ईरान के प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह) के साथ जटिल संबंध रखते हैं।
अरब देशों की भूमिका: कुछ अरब देश जैसे जॉर्डन, मिस्र, और ओमान ने कूटनीतिक तौर पर शांति की अपील की है, लेकिन वे ईरान के प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह) के साथ जटिल संबंध रखते हैं।
विश्लेषण : इजरायल को पश्चिमी देशों (खासकर अमेरिका और यूरोपीय देशों) का मजबूत समर्थन प्राप्त है, जो उसकी सैन्य और तकनीकी श्रेष्ठता को और बढ़ाता है।
ईरान का समर्थन रूस और कुछ हद तक चीन से मिल रहा है, साथ ही क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह, हमास) के माध्यम से वह अपनी स्थिति मजबूत करता है। हालांकि, ईरान की सैन्य क्षमता को हाल के इजरायली और अमेरिकी हमलों से नुकसान पहुंचा है।
यह संघर्ष क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव को बढ़ा रहा है, और रूस-चीन बनाम अमेरिका-नाटो के बीच एक व्यापक टकराव की आशंका बनी हुई है, खासकर अगर रूस और चीन ईरान को प्रत्यक्ष सैन्य समर्थन देते हैं।
ईरान का समर्थन रूस और कुछ हद तक चीन से मिल रहा है, साथ ही क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह, हमास) के माध्यम से वह अपनी स्थिति मजबूत करता है। हालांकि, ईरान की सैन्य क्षमता को हाल के इजरायली और अमेरिकी हमलों से नुकसान पहुंचा है।
यह संघर्ष क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव को बढ़ा रहा है, और रूस-चीन बनाम अमेरिका-नाटो के बीच एक व्यापक टकराव की आशंका बनी हुई है, खासकर अगर रूस और चीन ईरान को प्रत्यक्ष सैन्य समर्थन देते हैं।






