सेना पर गर्व करने का समय

अरुण श्रीवास्तव

मैं विशेषज्ञ नहीं कि तय करूं कि कब किसका समय आया है। कब क्या करना है यह सैन्य विशेषज्ञ व सैन्य अधिकारियों के सोचने समझने और निर्णय लेने का अधिकार है फिर तब तो और जब राजनीतिक नेतृत्व ने खुलेआम छूट का इजहार कर दिया हो। यह एक जनभावना है। वैसे भी जब जमींदार ग्रामीणों का जीना दुश्वार कर दे तो ग्रामीणों का हक़ बनता है कि जमींदार को ज़मींदोज़ कर दिया जाए। यही समय है, सही समय है पाक अधिकृत कश्मीर लेने का और पाकिस्तान को टुकड़े-टुकड़े में बांटने का।

हालांकि यह देश महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध का है और हमारी नीति पहले आक्रमण करने की नहीं है पर कोई हमारे एक गाल पर चांटा मारे तो हम दूसरा गाल भी नहीं बढ़ाएंगे क्योंकि पाकिस्तान है कि मानता नहीं। न चैन से रहेगा और न रहने देगा। जबकि होना यह चाहिए था कि, दोनों देशों को अपने अपने यहां पर व्याप्त गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से लड़ें पर पाकिस्तान लड़ रहा है भारत से। यह सच है कि अस्तित्व में आने के साथ ही उसने जम्मू-कश्मीर को पाने के लिए खुराफात शुरू कर दी। तबसे लेकर अब तक पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों को अंज़ाम देता रहा सीधी लड़ाई में कई बार ‘मुंह की खाई’ तब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। अब सच्चाई यह है कि कोई भी अपना पड़ोसी नहीं बदल सकता हम भी नहीं बदल सकते और अपनी ओछी हरकतों को पाकिस्तान भी नहीं बदल सकता क्योंकि साजिश उसकी रग रग में समाई हुई है। जबकि भारत ने समय-समय पर अपनी उदारता का परिचय दिया।

सिंधु जल बंटवारा वहां के आवाम के जीवन को देखते हुए स्वीकार किया गया। समय समय पर नागरिकों की आवाजाही, शिक्षा एवं इलाज़ के लिए भी पाकिस्तान की अवाम भारत आती रही है और व्यावसायिक गतिविधियां भी होती रही हैं। कला साहित्य, खेल व सिनेमा के लिए भारत ने पाकिस्तान के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे। सालों साल मोस्ट फेवरिट नेशन का सम्मान भी पाकिस्तान को दिया गया ताकि संबंध बेहतर हों। पर पाकिस्तान ने भारत के सीने पर जख्म ही दिये। करगिल युद्ध (1999) इसका जीता जागता उदाहरण है। जब इस बात पर सहमति बनी कि क्षेत्र के मौसम को देखते हुए दोनों सेनाएं वापस आ जाएंगी तब पाकिस्तान ने धूर्तता दिखायी। वादे के अनुसार भारतीय सेना तो वापस आ गई पर पाकिस्तानी सेना ने ऐसा न कर कई चौकियों पर काबिज हो गए।

भारतीय सेना ने मानवता दिखाते हुए ऑपरेशन विजय समाप्त होने के बाद मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों का तय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया वहीं पाकिस्तान ने अपने ही सैनिकों के शव लेने से इंकार कर दिया था। पाकिस्तान के हुक्मरान 9171 व करगिल युद्ध में हुई करारी हार (अपमान) भूल नहीं पाए इसलिए पहलगाम जैसी कायराना हरकतें करने से बाज नहीं आते। इतिहास गवाह है कि इसके पहले भी उन्होंने ऐसी ही कायराना हरकत बंबई के ताज़ होटल में की थी भारतीय संसद भवन पर हमला करके की थी। पाकिस्तान अच्छी तरह से जानता है कि आमने-सामने की लड़ाई में वह भारत से नहीं सकता इसलिए दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाता रहा है। जम्मू कश्मीर के लोगों की भावनाओं को भड़का कर बेरोजगार युवाओं का इस्तेमाल करता आया है।

दहशत की हर घटना के बाद हम उसको ‘मुंहतोड़’ जवाब देते हैं पर उसका मुंह ही नहीं टूटता। जबकि आमने-सामने की तीन-तीन लड़ाइयों में हमारी बहादुर सेना ने उसको घुटनों पर ला दिया था। आये दिन तमाम मामले में वह बेनकाब होता रहा बावजूद इसके ओछी हरकत करने से बाज नहीं आ रहा है। अभी कुछ ही दिन हुए पहलगाम में कुछ दहशतगर्दों ने कश्मीर आये सैलानियों की हत्या कर दी। इस वारदात में महिलाओं और बच्चों को अलग कर दिया गया और पुरुषों को निशाना बनाया गया। दहशतगर्दों का मकसद सिर्फ दहशत पैदा करना नहीं बल्कि एक बड़ा संदेश देना भी था। उनका उद्देश्य मजहबी वैमनस्य पैदा कर नफरत की खाई को और चौड़ा करना था।

गौरतलब है कि मुंबई के होटल ताज का हमला सिर्फ दहशत पैदा करना था क्योंकि होटल में सभी मज़हब के लोग थे। पर पहलगाम में ऐसा नहीं था। चूंकि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है तो ज्यादातर आये लोग अनेक धर्म के होंगे। फिर दहशतगर्दों ने खास तहकीकात कर घटना को अंज़ाम दिया था। इसके पीछे उनका मकसद मजहबी नफ़रत भड़का कर दंगे कराना भी हो सकता हो। पर यह हमारी सदियों पुरानी गंगा जमुनी तहज़ीब है कि वह अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो पाए। अंग्रेज भी नहीं हो पाए थे। बहरहाल हर बार पाकिस्तान कायराना हरकत करता है और हम उसको मुंहतोड़ जवाब देते हैं पर उसका मुंह टूटा ही नहीं। ठीक उसी तरह जिस तरह बार-बार रावण का सिर कटने के बाद जुड़ जाता था। रावण तभी नेस्तनाबूद हुआ जब उसकी नाभि में बाण मरा गया।

एक बार फिर मैं कहना चाहूंगा कि यह सही समय है कैसे कहूं? युद्ध किसी भी समय हो सही नहीं होता पर यह किसी एक पक्ष के समझने का नहीं है। युद्ध समस्या का समाधान नहीं है, युद्ध समस्याओं को जन्म देता है मसलन गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार बढ़ता है। अर्थव्यवस्था चौपट होती है। अगर किसी का फ़ायदा होता है तो हथियारों के कारोबारी का, सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं व नौकरशाहों का।
किसी ने कहा है ….
युद्ध होगा तो खत्म भी होगा।
शुरू होगी तो शांति की नौटंकी।
बड़े बड़े शहरों के
बड़े बड़े होटलों में
होंगी शांति वार्ताएं।
शांति आएगी
पर नहीं आएगी
शहीद परिजनों के चेहरों पर खुशी।
मां शहीद बेटे का
पत्नी शहीद पति का
बेटी शहीद बाप का करेंगी इंतजार…।

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