बिहार में एनडीए ने बांट लीं विधानसभा की सीटें!

-भाजपा के बदले सुर
-दिलीप जायसवाल की मानें तो ‘जय नीतीश-तय नीतीश’

दीपक कुमार तिवारी

पटना। मकर संक्रांति के दही-चूड़ा भोज से बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की उम्मीद विपक्ष को थी। कुछ साल के शुभारंभ से ही ऐसी चर्चाएं खूब हो रही थीं। कोई खेल होने की बात कह रहा था तो कोई दरवाजा खोल कर बैठा था। सियासी बदलाव की संभावनाओं के केंद्र में नीतीश कुमार थे। लालू यादव, मीसा भारती और रोहिणी आचार्य की बातों में नीतीश के प्रति नरमी उन्हें लुभाने-मनाने का संकेत दे रही थीं।
नीतीश भी कभी हंस कर तो कभी हाथ जोड़ कर लोगों में भ्रम बनाए हुए थे। पर, दो दिवसीय दही-चूड़ा भोज के बाद नीतीश ने सारे कयासों पर महीने भर में कम से कम तीन बार यह कह कर पानी फेरने का प्रयास किया कि वे जहां हैं, वहीं रहेंगे। अब नीतीश कुमार आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और उनके बड़े भाई तेज प्रताप के लिए खट्टे अंगूर की तरह हो गए हैं।
तेजस्वी कहने लगे हैं कि नीतीश कुमार कुमार को आरजेडी के साथ लाने का मतलब है अपने पांव में कुल्हाड़ी मारना तो तेज प्रताप कह रहे कि नीतीश के लिए आरजेडी के दरवाजे फिर बंद हैं। तेजस्वी को पहले खेल की उम्मीद थी। अब वे इस कदर हताश हैं कि खेल के बजाय सीधे चुनाव मैदान में फरियाने की बात कहने लगे हैं। लालू ने भी अब इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। अब वे जातीय समीकरण के नए तिकड़म में लग गए हैं। यानी संक्रांति से किस्मत का ताला खुलने की आरजेडी नेताओं की उम्मीद पर नीतीश ने पानी फेर दिया है।
नीतीश कुमार गुरुवार को अपनी प्रगति यात्रा के क्रम में खगड़िया पहुंचे थे। समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने इस महीने में तीसरी बार दोहराया कि वे एनडीए नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा- ‘24 नवंबर, 2006 से हमलोग भाजपा के साथ मिलकर निरंतर बिहार को आगे बढ़ा रहे हैं। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने ही अपने प्रधानमंत्रित्व काल में मुझे केंद्र में मंत्री बनाया था। पार्टी के लोगों की गलती के कारण दो बार हम इधर से उधर चले गये, लेकिन अब हम जहां हैं, वहीं रहेंगे।’ नीतीश कुमार की इस सफाई के बाद आरजेडी कैंप में सन्नाटा पसरना स्वाभाविक है।
बताया जा रहा था कि भाजपा से नीतीश नाराज हैं। नाराजगी का स्पष्ट कारण भी बताया जा रहा था। अमित शाह के बयान को नीतीश की नाराजगी का कारण कहा जा रहा था। पर, भाजपा को नीतीश कुमार पर कितना भरोसा है, यह प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के इस बयान से समझा जा सकता है। दिलीप जायसवाल ने कहा है कि एनडीए में कहीं कोई खटपट नहीं है। चुनाव के सारे फॉर्मूले तय कर लिए गए हैं। घटक दलों में सीटें बंट गई हैं। जय नीतीश, तय नीतीश का चुनावी स्लोगन भी उन्होंने सुना दिया। नाराजगी के सवाल पर नीतीश कुमार की सफाई भी लगातार आ रही है। ऐसे में आरजेडी का निराश होना स्वाभाविक है।
इतनी जानकारी तो छन-छन कर बाहर आ ही चुकी है कि भाजपा और जेडीयू के बीच सीटों का बंटवारा हो चुका है। जेडीयू विधानसभा की 122 सीटें अपने पास रखेगा और भाजपा के पास 121 सीटें रहेंगी। जेडीयू अपने पुराने साथियों जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को अपने हिस्से से सीटें देकर संतुष्ट करेगा तो भाजपा चिराग पासवान से निपटेगी। शायद इसी वजह से दिलीप जायसवाल ने कहा कि टिकट बंटवारे का फार्मूला सेट हो चुका है। टिकट बंटवारा भी हो चुका है। दरअसल उन्होंने यह बात जीतन राम मांझी की ओर से 20 सीटों की मांग पर कही है।

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