नए आपराधिक कानून के तहत दिल्ली में पहला मामला दर्ज, जानें क्या है आरोप

देश में आज एक जुलाई से अपराध और न्याय के लिए नए कानून लागू हो गए। अब आपराधिक घटनाओं की प्राथमिकी नए कानून के अनुसार दर्ज होंगी और मुकदमे भी नए कानून के आधार पर ही चलाए जाएंगे। संगीन अपराधियों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी। पीड़ित और गवाहों को धमकी या लालच देकर मामले को प्रभावित करना या कोर्ट से बाहर समझौता करना उनके लिए आसान नहीं रह जाएगा। देश की राजधानी में दिल्ली पुलिस ने नव अधिनियमित भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस) के तहत दिल्ली के एक रेहड़ी-पटरी वाले के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की है।

नए आपराधिक कानून के तहत दिल्ली में पहली FIR दर्ज

रविवार रात गश्त पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने सड़क पर पानी की बोतलें और गुटखा बेचते एक रेहड़ी-पटरी वाले को देखा, जिसके बाद विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। उसकी अस्थायी दुकान ने सड़क को बाधित कर दिया था और इसे हटाने के बार-बार अनुरोध के बावजूद उसने इसका पालन नहीं किया। बाद में एक कार्यालय ने एफआईआर दर्ज करने की कार्यवाही की। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के साथ बीएनएस देश में आपराधिक प्रक्रिया और साक्ष्य को नियंत्रित करने वाले लंबे समय से चले आ रहे ब्रिटिश युग के कानूनों की जगह लेता है।

लोगों को जागरूक करने का काम शुरू

पुलिसकर्मियों और वकीलों के लिए नए कानून को याद रखना काफी मुश्किल होगा। इसी वजह से प्रशासन लगातार पुलिसकर्मियों के लिए मीटिंग और ट्रेनिंग आयोजित कर रहा है। लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है। स्पेशल सीपी, छाया शर्मा ने आज 1 जुलाई 2024 से लागू होने वाले तीन आपराधिक कानूनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “भारतीय न्यायिक संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम आज से लागू हो गया है। आज से इन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएंगी। इसके लिए हमारी ट्रेनिंग 5 फरवरी से शुरू हुई थी।

मुख्य रूप से क्या बदला ?
1- भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) होगी। आइपीसी में 511 धाराएं थी लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं होंगी। धाराओं का क्रम बदला गया है।
2- सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) कहलाएगी। सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं। नए कानून में अब इसमें 531 धाराएं होंगी।
3- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए), 2023 के नाम से जाना जाएगा। पुराने कानून में 167 प्रावधान थे। नए में 170 हो गए हैं। डिजिटल सबूतों का महत्त्व बढ़ाया गया है।
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