अगले दो दो दिनों तक मौसम शुष्क रहने की संभावना
सुभाष चंद्र कुमार
समस्तीपुर पूसा। डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी 18-22 मई, 2024 तक के मौसम पूर्वानुमानित अवधि में उत्तर बिहार के जिलों में आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाये रह सकते हैं। अगले 1-2 दिनों तक उत्तर बिहार में मौसम शुष्क रहने की सम्भावना है। उसके बाद 21-22 मई को उत्तर बिहार के अनेक स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ हल्की वर्षा होने का अनुमान है।
इस अवधि में अधिकतम तापमान 38-40 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। जबकि न्यूनतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रह सकता है।
इधर शुक्रवार की तापमान पर एक नजर डालें तो अधिकतम तापमानः 37.5 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक एवं न्यूनतम तापमानः 24.8 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस कम रहा है। सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 65 से 75 प्रतिशत तथा दोपहर में 40 से 45 प्रतिशत रहने की संभावना है।पूर्वानुमानित अवधि में औसतन 12 से 18 कि०मी० प्रति घंटा की रफ्तार से पुरवा हवा चलने का अनुमान है।
समसामयिक सुझाव देते हुए मौसम वैज्ञानिक ने बताया है कि अगले 1-2 दिनों तक मौसम शुष्क रहने की सम्भावना को देखते हुए मक्का फसल की कटनी, दौनी तथा दानो को सुखाने के कार्य को प्राथमिकता देकर संपन्न कर लें। 1-2 दिनों के बाद वर्षा होने की सम्भावना को देखिए हुए किसान भाई कीटनाशकों का छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करें।
अभी जो किसान भाई सिचाई करना चाहते है ऐसे किसान फिलहाल सिचाई स्थागित रखे। लम्बी अवधि वाले धान की किस्में जैसे-राजश्री, राजेन्द्र मंसुरी, राजेन्द्र स्वेता, किशोरी, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1 वी०पी०टी०-5204 एवं सत्यम की नर्सरी 25 मई से लगा सकते हैं। र्नसरी के लिए खेत की तैयारी करें। स्वस्थ पौध के लिए र्नसरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का व्यवहार करे।
नर्सरी में क्यारी की चौराई 1.25-1.5 मीटर तथा लम्बाई सुविधानुसार रखें। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई हेतु 800 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की नर्सरी तैयार करें। बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्त्रोत से करें। बीज गिराने के पूर्व बीजोपचार अवश्य कर लें। जिन किसान भाई का खेत खाली है तथा वे खरीफ धान की नर्सरी समय से लगाना चाहते है वैसे किसान भाई खेत की तैयारी शुरू कर दें।
स्वस्थ पौध के लिए र्नसरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का व्यवहार करें। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई हेतु 800-1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बीज गिरावें। नर्सरी में क्यारी की चौड़ाई 1.25-1.5 मीटर तथा लम्बाई सुविधा अनुसार रखें। बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्त्रोत से करें। देर से पकने वाली किस्मों की नर्सरी 25 मई से लगा सकते है।
हल्दी की बुआई के लिए मौसम अनुकूल है। किसान भाई इसकी बुआई करें। हल्दी की राजेन्द्र सोनिया, राजेन्द्र सोनाली किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है। खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 60 से 75 किलोग्राम, स्फूर 50 से 60 किलोग्राम, पोटास 100 से 120 किलोग्राम एवं जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे।
हल्दी के लिए बीज दर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें। बीज प्रकन्द का आकार 30-35 ग्राम जिसमें 4 से 5 स्वस्थ कलियाँ हो। रोपाई की दूरी 30×20 से०मी० तथा गहराई 5 से 6 से०मी० रखे। अच्छे उपज के लिए 2.5 ग्राम इन्डोफिल 45+0.1 प्रतिषत बेविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से घोल बनाकर उसमें आधा घंटे तक उपचारित करने के बाद बुआई करे।
बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्त्रोत से करें। लत्तर वाली सब्जियों जैसे नेनुआ, करैला, लौकी (कद्दू), और खीरा फसलों में फल मक्खी कीट की निगरानी करें। इन फसलों को क्षति पहुंचाने वाला यह प्रमुख कीट है। यह घरेलू मक्खी की तरह दिखाई देने वाली भूरे रंग की होती है। मादा कीट मुलायम फलों की त्वचा के अन्दर अंडे देती है। अंडे से पिल्लू निकलकर अन्दर ही अन्दर फलों के भीतरी भाग को खाता है। जिसके कारण पूरा फल सड़ कर नष्ट हो जाता है।
इस कीट का प्रकोप शुरू होते ही 1 किलोग्गाम छोआ, 2 लीटर मैलाथियान 50 ई०सी० को 1000 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिनों के अन्तराल पर दो बार छिड़काव आसमान साफ रहने पर ही करें। अदरक की बुआई करें। अदरक की मरान एवं नदिया किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुषंसित है। खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 30 से 40 किलोग्राम, स्फूर 50 किलोग्राम, पोटास 80 से 100 किलोग्राम जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम एवं बोरेक्स 10 से 12 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे।
अदरक के लिए बीज दर 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें। बीज प्रकन्द का आकार 20-30 ग्राम जिसमें 3 से 4 स्वस्थ कलियाँ हो। रोपाई की दूरी 30×20 से०मी० रखे। अच्छे उपज के लिए रीडोमिल दवा के 0.2 प्रतिषत घोल से उपचारित बीज की बुआई करें। खरीफ मक्का की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें। खेत की जुताई में 10 से 15 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे।
बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 30 किलो नेत्रजन, 60 किलो स्फुर एवं 50 किलो पोटाष का व्यवहार करें। उत्तर विहार के लिए अनुशंसित मक्का की किस्में जैसे सुआन, देवकी, शक्तिमान- 1. शक्तिमान-2, राजेन्द्र संकर मक्का-3, गंगा-11 है। खरीफ मक्का की बुआई 25 मई से करें। अपने पशुओं को कीड़े की दवा देने के 10 दिनों बाद खुरपका-मुहपका रोग का टिका लगवायें। गर्मी के महीनों में पशुओं को 50 ग्राम नमक एवं 50 ग्राम खनीज मिश्रण दें। भूसा खरीदकर पूरे वर्ष के लिए रख लें।








