बिना जलस्रोत के निजी लाभ के लिए सरस्वती नदी को बनाया गया सरस्वती कुंड

गंदगी से बजबजा रहा सरस्वती कुंड

एक करोड़ 65 लाख की लागत से हुआ निर्माण और सौन्दर्यीकरण

 विजिलेंस से जांच की मांग

रामविलास
राजगीर। अध्यात्मिक शहर राजगीर का नवनिर्मित सरस्वती कुंड गंदगी से बजबजा रहा है। इस कुंड में पांच घड़ियाल मुख झरने लगाये गये हैं। इसी से दूसरे कुंडों के गंदे पानी को पाइप के माध्यम से सरस्वती कुंड में गिराने की व्यवस्था जिम्मेदारों द्वारा की गयी थी। मलमास मेला के दौरान जब हकीकत की जानकारी तीर्थयात्रियों को मिली तो इस नवनिर्मित सरस्वती कुंड में स्नान बन्द हो गया।

 

तब से यह गंदगी से बजबजा रहा है। इसका एक झरना भी रहस्यमय ढंग से गायब हो गया है। सरस्वती कुंड के सभी झरने मलमास मेला से ही बन्द है। यानि आरंभ के एक सप्ताह बाद से ही यह कुंड बेकार साबित हो रहा है। गंदगी के कारण यह कुंड पांव रखने लायक भी नहीं रह गया है। अब तो यह न नदी रही और न ही कुंड। इसकी ऐसी हालत निर्माण के एक साल पूरा होने के पहले हो गयी है।

सरस्वती नदी से सरस्वती कुंड के निर्माण और सौन्दर्यीकरण पर करीब एक करोड़ 65 लाख खर्च किये गये हैं। इतनी लागत से बने इस कुंड का अब कोई पूछने और देखने वाले भी नहीं हैं। यही कारण है कि सरस्वती कुंड गंदगी से बजबजा रहा है। यह दुर्गंध फैला कर राजगीर तीर्थ को बदनाम कर रहा है। स्थानीय लोगों की माने तो दुविधा में दोनों गये माया मिली न राम वाली कहावत को यह चरितार्थ कर रही है।

सरस्वती नदी से सरस्वती कुंड बनने के बाद ब्रह्मकुंड के पास नदी का अस्तित्व समाप्त हो गया है। जानकार बताते हैं कि राजगीर के अन्य गर्म जल के कुंडों की तरह सरस्वती कुंड के झरनों का स्रोत प्राकृतिक नहीं है। ब्रह्मकुंड आदि के गंदे पानी को पाइप द्वारा सरस्वती में लाया गया है। मलमास मेला के आरंभ के दिनों में तीर्थयात्रियों का दल केवल स्नान ही नहीं करते थे बल्कि इसके जल का याचमन भी करते थे।

जब इस कुंड और इसके जलस्रोत की हकीकत का पता चला तो तीर्थयात्रियों में इसके प्रति घृणा हो गयी। सरस्वती नदी को सरस्वती कुंड में तब्दील करने और उसके सौन्दर्यीकरण का काम जल संसाधन विभाग द्वारा पंडा कमिटी की देखरेख में किया गया है। स्थानीय नागरिक जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से पूछते हैं कि किसके सुझाव पर सरस्वती नदी को सरस्वती कुंड बनाया गया है।

जब इसका जलस्रोत प्राकृतिक नहीं है तो दूसरे कुंडों के गंदे पानी को प्रवाहित करने और तीर्थयात्रियों से क्यों धोखाधड़ी किया गया है। वार्ड पार्षद डाॅ अनिल कुमार, महेन्द्र यादव, भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष मुन्ना लाल पासवान, जिला पार्षद नूतन देवी, पैक्स अध्यक्ष अरुण कुमार, राजगीर सेवा समिति के सचिव सुरेन्द्र प्रसाद, भाजपा नेता डॉ प्रमोद कुमार, उपेन्द्र कुमार विभूति, पप्पू कुमार सिंह एवं अन्य ने इसकी जांच विजिलेंस से कराने की मांग की है।

उनलोगों ने कहा कि साजिश के तहत सरस्वती नदी को सरस्वती कुंड बनाया गया है। प्राकृतिक जलस्रोत नहीं होने के कारण यह नरक कुंड बन गया है। इससे पारंपरिक जलस्रोत भी बर्बाद हो गया है। अब तो यह न नदी है और न ही कुंड। सरस्वती नदी राजगीर के धरोहरों में एक है। इसके अस्तित्व से छेड़छाड़ गैरजिम्मेदराना से कम नहीं है।

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