पूंजीपतियों से चंदा नहीं लेतीं मायावती ?

बसपा मुखिया ने बताया – Electoral Bond से बसपा को क्यों नहीं मिला एक भी रुपया?  

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस मामले पर एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखा है। 

द न्यूज 15 ब्यूरो 

लखनऊ। लोकसभा चुनाव में भले ही बसपा मुखिया मायावती दबाव में देखी जा रही हों पर चुनावी बांड मामले में वह आरोप से मुक्त नजर आ रही हैं। लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में बीएसपी सुप्रीमो मायावती की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस मामले पर एक्स पर एक लंबा पोस्ट लिखा है।

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा-“रक्षा सौदों आदि में भ्रष्टाचार के बाद चर्चित गुप्त चुनावी बाण्ड से उगे धनबल द्वारा देश की राजनीति एवं चुनाव को भी जनहित व जनमत से दूर करने की प्रक्रिया के विरुद्ध मा. सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला महत्वपूर्ण, किन्तु संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतत प्रयास जरुरी है।

वहीं पूर्व सीएम मायावती ने आगे लिखा-“जहां सहारा वहां इशारा, इससे बचने के लिए बीएसपी बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के धनबल से दूर है और जिस कारण यूपी में चार बार बनी सरकार में जनहित, जनकल्याण तथा गरीबी व पिछड़ेपन को दूर करने के लिए ऐतिहासिक पहल किए, जबकि दूसरी पार्टियां अधिकतर स्वार्थ में ही लगी हैं।

वहीं बीएसपी सुप्रीमो ने कहा-“देश में अब लोकसभा के लिए हो रहे आम चुनाव में जन व देशहित में इन बातों का खास महत्व है तभी बहुजन हितैषी सरकार देश में बनकर लोगों को जानलेवा महंगाई, बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी व पिछड़ेपन के लाचार जीवन से मुक्ति मिल पाएगी, वरना गरीबों की गरीबी व अमीरों की अमीरी लगातार बढ़ती जाएगी.”

बीजेपी को सबसे अधिक चंदा

बता दें कि इलेक्टोरल बॉन्ड में चंदा लेने वाली राजनीतिक पार्टियों बीएसपी का नाम नहीं है। इसमें सबसे उपर नाम बीजेपी का है जिसे 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला है, वहीं दूसरे नंबर पर टीएमसी है जिसे एक हजार करोड़ से अधिक का चंदा मिला है।

SC ने एसबीआई को फिर से जारी किया नोटिस

बता दें कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से किए गए चंदे का डेटा भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को सौंप दिया, वहीं एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को नोटिस जारी कर पूछा है कि बॉन्ड नंबरों का खुलासा क्यों नहीं किया, वहीं कोर्ट ने कहा कि बैंक ने यूनिक कोड नंबर क्यों नहीं बताया और पूरा डेटा क्यों नहीं जारी किया है।

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