अब MSP गारंटी कानून का वादा कर रही कांग्रेस, 2010 में लागू करने से साफ कर दिया था इनकार

किसान संगठन विभिन्‍न मांगों को लेकर सड़क पर हैं. बड़ी तादाद में किसान अपनी मांगों को लेकर पंजाब से दिल्‍ली की तरफ कूच कर चुके हैं. कुछ जगहों पर किसानों और पुलिस में टकराव की स्थिति भी उत्‍पन्‍न हुई. किसानों के ‘दिल्‍ली चलो’ मार्च को देखते हुए देश की राजधानी में सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम किए गए हैं. दिल्‍ली से लगती सीमाओं को सील कर दिया गया है, ताकि प्रदर्शनकारी किसान दिल्‍ली की सीमा के अंदर प्रवेश न कर सकें.
पंजाब के हजारों किसानों ने फसलों की MSP पर खरीद की कानूनी गारंटी मांगते हुए दिल्ली कूच कर दिया। फिलहाल हरियाणा और पंजाब को जोड़ने वाले शंभू बॉर्डर पर हजारों किसान और पुलिस आमने-सामने हैं। इसके चलते हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार MSP की कानूनी गारंटी को लेकर तमाम पेच बता रही है, जबकि कांग्रेस ने किसानों को सरकार बनने पर इसे लागू करने का वादा कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में ऐलान किया था कि यह कांग्रेस की गारंटी है कि हम सत्ता में आए तो MSP पर फसल खरीद का कानून लागू करेंगे।
हालांकि कांग्रेस ने ही 2010 में स्वामीनाथन आयोग की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, जिसमें फसलों की MSP लागत से डेढ़ गुना तक करने की सिफारिश थी। इस संबंध में भाजपा के तत्कालीन राज्यसभा सांसद प्रकाश जावड़ेकर कृषि मंत्री केवी थॉमस से सवाल पूछा था कि क्या स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाएगा।

यह सवाल 16 अप्रैल, 2010 को पूछा गया था। इस पर कांग्रेसी मंत्री ने विस्तार से जानकारी देते हुए रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि यदि ऐसा हुआ तो फिर अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। प्रकाश जावड़ेकर ने तब सवाल किया था कि क्या किसानों को MSP दिए जाने के मसले पर सरकार स्वामीनाथन आयोग की ओर से दी गई सिफारिशों को लागू करने जा रही है? इस पर जवाब देते हुए केवी थॉमस ने विस्तार से इसे लागू न कर पाने के कारण बताए थे और कहा था कि इससे अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी।

कांग्रेसी मंत्री ने कहा था, ‘प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में किसानों पर बने राष्ट्रीय की सिफारिशें मिली हैं। इनमें कहा गया है कि फसलों पर लगी किसान की कुल लागत से डेढ़ गुना अधिक MSP दी जानी चाहिए। हालांकि सरकार ने उनकी इन सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया है। यदि इन्हें लागू किया तो फिर इससे मार्केट पर बुरा असर होगा। इससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। कुछ मामलों में MSP और फसलों के उत्पादन लागत को जोड़कर देखना गलत होगा। इससे बाजार पर सही असर नहीं होगा।’

अब राहुल गांधी क्या कह रहे हैं?
कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी देश के लिए फैसले लेती है, न कि राजनीति के लिए, एमएसपी पर कानूनी गारंटी के वादे पर आलोचना का जवाब देते हुए। उन्होंने यह भी बताया कि यूपीए सरकार ने स्वामीनाथन समिति द्वारा की गई 201 में से 175 सिफारिशों को लागू किया था। किसान, समिति की सिफारिशों के आधार पर, C2+50 फॉर्मूले को लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें एमएसपी द्वारा कवर की गई 23 फसलों के लिए उत्पादन की व्यापक लागत शामिल है। हालांकि, सरकार ने कहा है कि कोई भी प्रतिबद्धता बनाने से पहले इस मुद्दे की विस्तार से जांच करने की जरूरत है।

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