Got Justice : राजा छोड़ गये 20 हजार करोड़ की संपत्ति, 30 साल बेटियों ने लड़ी कानूनी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

फरीदकोट महाराज की सपंत्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। उनकी बेटियों की 30 साल कानूनी लड़ाई कामयाब हो गई। कोर्ट ने महाराज की वसीयत को गलत ठहराते हुए बेटियों को संपत्ति में हक दिया। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक ऐसा फैसला सुनाया गया, जिसके बाद 30 साल से चले आ रहे संपत्ति विवाद का निपटारा हो गया। मामला कोई छोटी-मोटी प्रापर्टी का नहीं था बल्कि फरीदकोट के महाराज की सपंत्ति लगभग 20 हजार करोड़ की है। इस मामले में हक के लिए उनकी बेटियां 30 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही थी। इसमें हीरे-जवाहरात, किला, राजमहल और कई जगहों पर इमारतें शामिल हैं। आखिर में दोनों बहनों की जीत हुई और इस संपत्ति में बड़ा हिस्सा उन्हें देने का फैसला बरकरार रखा गया है। सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस एस रविंदर भट्ट और जस्टिस सुधांशु धूलियां की बेंच ने कुछ सुधार के साथ हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को इस फैसले को सुरक्षित रख लिया था।

क्यों था विवाद

महारावल खेवाजी ट्रस्ट और महाराज की बेटियों के बीच की यह कानूनी जंग लीगल हिस्ट्री में सबसे लंबी चलने वाली लड़ाइयों में से एक है। महाराजा की वसीयत को खत्म करते हुए कोर्ट ने महारावल खेवाजी ट्रस्ट को भी 33 साल के बाद डिजॉल्व करने का फैसला सुना दिया है। ट्रस्ट के सीईओ जागीर सिंह सारन ने कहा, हमें अब तक सुप्रीम कोर्ट का मौखिक फैसला का ही पता चला है, कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। जुलाई 2020 में ट्रस्ट ने ही सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के अब तक सुप्रीम कोर्ट का मौखिक फैसला ही पता चला है कि कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। जुलाई 2020 में ट्रस्ट ने ही सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। इसके बाद 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दे दिया था और ट्रस्ट को देखरेख की इजाजत दी थी।
साल 2013 में चंडीगढ़ जिला अदालत ने बेटियों अमृत कौर और दीपिंदर कौर के हक में फैसला सुनाया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ट्रस्ट के लोग प्रॉपर्टी हथियाने के लिए साजिश रच रहे हैं और फर्जी बातें कर रहे हैं।

क्या है कहानी

साल 1918 में अपने पिता की मौत के बाद हरिंदर बरार को केवल 3 साल की उम्र में महाराजा बनाया गया था। वह इस रियासत के आखिर महाराज थे। बरार और उनकी पत्नी नदिंर कौर के तीन बेटियां थीं, अमृत कौर, दीपिंदर कौर और महीपिंदर कौर। उनका एक बेटा भी था, जिसका नाम हरमोहिंदर सिंह था। महाराज के बेटे की 1981 में एक रोड एक्सिडेंट में मौत हो गई थी। इसके बाद महाराज अवसाद में चले गये। इसके सात या आठ महीने बाद उनकी वसीयत तैयार की गई।

बीमार महाराज की पत्नी और मां भी थी अंधेरे में

महाराज की संपवि की देखरेख के लिए एक ट्रस्ट बना दिया गया। इस बात की जानकारी उनकी पत्नी और मां को भी नहीं थी। दीपिंदर कौर और महीपिंदर कौर को इस ट्रस्ट का चेयरपर्सन बना दिया गया। वहीं इस वसीयत में यह भी लिखा गया था कि सबसे बड़ी बेटी अमृत कौर ने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी की है। इसलिए उन्हें बेदखल किया जाता है। यह वसीयत तब सामने आई जब महाराज की 1989  में मौत हो गई।

एक बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

संदिग्ध परिस्थितियों में महाराज की बेटी महीपिंदर कौर की मौत हो गई। शिमला में उनकी मौत हुई थी। अमृत कौर ने १९९२ में स्थानीय अदालत में केस फाइल किया था। उनका कहना था कि हिंदू ज्वाइंट फैमिली होने की वजह से संपत्ति पर उनका अधिकार था, जबकि उनके पिता की वसीयत में सारी प्रॉपर्टी ट्रस्ट को दी गई थी। अमृत कौर ने इस वसीयत पर सवाल खड़े किये थे।

कहां-कहां है महाराज की संपत्ति

दरअसल आजादी के बाद महाराज को 20  हजार करोड़ की संपत्ति दी गई। इसमें चल अचल संपत्ति शामिल है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के अलावा चंडीगढ़ में भवन और जमीन है।

फरीदकोर्ट का राजमहल

फरीदकोर्ट का राजमहल 14  एकड़ में है। यह 1885 में बना था, अब इसके एक हिस्से में 150  बेड का चैरिटेबल अस्पताल चल रहा है। किला मुबारक, फरीदकोट-1775 में इस किले को राजा हमीर सिंह ने बनवाया था। यह 10 एकड़ में है जो इमारत अब बची है उसका निर्माण 1890 में हुआ था।

नई दिल्ली का फरीदकोट हाउस

नई दिल्ली में कॉपरनिकस मार्ग पर एक बड़ा भूमि का टुकड़ा है। केंद्र सरकार ने इसे किराये पर ले रखा है और हर महीने लगभग 17 लाख का किराया देती है। इसकी कीमत लगभग 1200  करोड़ रुपये नौ साल पहले थी। इसके अलावा चंडीगढ़ में मनीमाजरा किला, शिमला का फरीदकोट हाउस महाराजा की सपंत्ति में शामिल हैं। 1929 मॉडल रोल्स रॉयस, 1929 मॉजल ग्राहम, 1940 मॉडल बेंडली, जगुआर, डामलर, पैकार्ड भी हैं, जो कि अभी चालू हालत में हैं। इसके अलावा 9  हजार करोड़ के हीरे जवाहरात हैं जो कि मुंबई के स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के पास सुरक्षित हैं।

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