Nationalism of Syama Prasad Mookerjee : श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवाद के आड़े आता है मुस्लिम लीग के साथ सरकार बनाना!

Nationalism of Syama Prasad Mookerjee : भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध करने का लगता है आरोप

Nationalism of Syama Prasad Mookerjee : जब भाजपा धर्म के आधार पर देश के बंटवारे के लिए महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराती है। जवाब में कांग्रेस हिन्दू महासभा के मुस्लिम लीग के साथ मिलकर बंगाल में संविद सरकार बनाने और सरकार में Syama Prasad Mookerjee के वित्त मंत्री बनने पर भाजपा पर निशाना साधती है। कांग्रेस श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध करने तथा आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजों को उपाय सुझाने का आरोप लगाकर Nationalism of Syama Prasad Mookerjee पर उंगली उठाती है। 

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National Unity and Integrity : दरअसल बुधवार को Syama Prasad Mookerjee की जयंती पर भाजपा ने श्याम प्रसाद मुखर्जी को राष्ट्रीय एकता व अखंडता का पर्याय बताते हुए ट्वीट किया है। इस ट्वीट में National Unity and Integrity के पर्याय, महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी और भारतीय जनसंघ के संस्थापक परम श्रद्धेय Syama Prasad Mookerjee की जयंती पर कोटि-कोटि नमन लिखा गया है।  सन 1940 में लाहौर में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने अपना तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया था। यही वह सम्मेलन था जिसमें मुस्लिम लीग ने भारत के बंटवारे की नींव डाली थी। दरअसल लाहौर के मिंटो पार्क में चले इस सम्मेलन में 23 मार्च को मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। देश को खंडित करने का यह प्रस्ताव मुस्लिम लीग बंगाल के वरिष्ठ नेता अबुल कासिम फजलुल द्वारा पेश किया गया था। इसी मुस्लिम लीग के साथ मिलकर हिन्दू महासभा ने बंगाल में संविद सरकार बनाई थी।

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दरअसल यह दौर द्वितीय विश्व युद्ध का था। British rule की ओर से भारतीय सैनिकों को युद्ध में झोंका जा रहा था। कांग्रेस भारतीय सैनिकों के युद्ध में भेजने के विरोध में विभिन्न राज्यों में चल रही अपनी सरकारों को भंग करने का निर्देश दे रही थी। बताया जाता है कि Hindu Mahasabha ठीक इसके उल्टे मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सिंध, उत्तर पश्चिम प्रांत और बंगाल में सरकार बना रही थी। जब Hindu Mahasabha और मुस्लिम लीग की बातचीत हो गई तो 1941 में हिन्दू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन कर बंगाल में सरकार बनाई।

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सरकार के प्रीमियर यानी कि प्रधानमंत्री फजलुल और Syama Prasad Mookerjee वित्त मंत्री बने थे। फजलुल की सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी का वित्तमंत्री के रूप में कार्यकाल 11 महीने का रहा था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर कांग्रेस इसलिए भी आरोप लगाती है क्योंकि उसका मानना है कि Syama Prasad Mookerjee को पता था कि मुस्लिम लीग  Partition of the Country का संकल्प ले चुकी है और उन्होंने न केवल उसके साथ मिलकर सरकार बनाई थी बल्कि उसमें वह वित्तमंत्री भी रहे। यह सरकार British rule के अधीन थी। जब हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग की संविद सरकार बंगाल में चल रही थी तो उस समय हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनायक दामोदर सावरकर थे।

सावरकर ने 1942 में कानपुर में हुए हिन्दू महासभा के 24वें सम्मेलन में कहा था बंगाल का मामला मशहूर है। मुस्लिम लीग के लोगों को कांग्रेस तो नहीं समझा पाई पर Hindu Mahasabha के संपर्क में आने के बाद वे समझौता करने को राजी हो गये। उन्होंने कहा था कि फजुलल हक के प्रीमियरशिप में सरकार बनी और महासभा के हमारे नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कुशल नेतृत्व में चलने वाली साझा सरकार लगभग एक साल तक सफलतापूर्वक काम करती रही उन्होंने दोनों समुदायों के फायदे की भी बात कही थी। सावरकर उस मुस्लिम लीग की  तारीफ कर रही थी जो Partition of the Country कर रही थी। 

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श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध करने का भी आरोप लगता है। उनके विरोधी Syama Prasad Mookerjee पर आरोप लगाते हैं कि 26 जुलाई 1942 को बंगाल के गवर्नर सर जॉन आर्थर हरबर्ट को लिखे पत्र में मुखर्जी ने कहा था कि सवाल यह है कि बंगाल में भारत छोड़ो आंदोलन को कैसे रोका जाए ? प्रशासन को इस तरह काम करना चाहिए कि कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बावजूद यह आंदोलन प्रांत में अपनी जड़ें न जमा सके। इस सरकार के सभी मंत्री लोगों को यह कहकर समझा रहे थे कि कि कांग्रेस ने जिस आजादी के लिए आंदोलन शुरू किया वह लोगों का पहले से ही हासिल है। मतलब Syama Prasad Mookerjee अंग्रेजी हुकूमत के रहते हुए अपनी सरकार चलाने को आजादी मानकर चल रहे थे। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता और अखंडता को लेकर संकल्प लिये हुए थे तो मुस्लिम लीग के साथ सरकार क्यों बनाई और चलाई भी?  

श्यामा प्रसाद मुखर्जी 1941 में इसी हिन्दू महासभा के अध्यक्ष बने थे।  श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी 33 वर्ष की उम्र में ही कलकत्ता यूनिवर्सिटी के कुलपति बन गये थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी पहले कांग्रेस से जुड़े थे तो बाद में मतभेद के कारण उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। जवाहर  लाल नेहरू ने अपनी अंतरिम सरकार में Syama Prasad Mookerjee को मंत्री बनाया था लेकिन उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर मंत्री पद दे इस्तीफा दे दिया था। वह कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने और धारा 370 के खिलाफ थे, उनका कहना था कि एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे।  

दरअसल Syama Prasad Mookerjee नेहरू की पहली सरकार में मंत्री थे, जब Nehru Liaquat Pact हुआ तो उन्होंने बंगाल के एक और मंत्री ने इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद उन्होंने जनसंघ की स्थापना की। आम चुनाव के तुरंत बाद दिल्ली के नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस और जनसंघ में बहुत कड़ी टक्कर हो रही थी। इस माहौल में संसद में बोलते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि चुनाव जीतने के लिए वह वाइन और मनी का इस्तेमाल कर रही है। इस आरोप का नेहरू ने जमकर विरोध किया था।

नेहरू वाइन को वुमेन समझ गये थे तो उन्होंने खड़े होकर इसका विरोध किया। मुखर्जी ने आधिकारिक रिकार्ड उठाकर देख लेने की बात कही तो नेहरू ने महसूस किया कि उन्होंने गलती कर दी है। उन्होंने भरे सदन में खड़े होकर उनसे माफी मांगी। तब मुखर्जी ने उनसे कहा कि माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है। बस मैं तो यह कहना चाहता हूं कि मैं गलतबयानी नहीं करूंगा।

 Nationalism of Syama Prasad Mookerjee के बारे में कहा जाता है कि वह चाहते थे कि कश्मीर में जाने के लिए किसी को कोई अनुमति न लेनी पड़े। यही वजह थी कि 1953 में आठ मई को वह बिना अनुमति के दिल्ली से कश्मीर के लिए निकल पड़े थे। 10 मई को जालंधर में उन्होने कहा था कि हम जम्मू-कश्मीर में बिना अनुमति के जाएं ये हमारा मूलभूत अधिकार होना चाहिए। 11 मई को वे श्रीनगर जाते हुए गिरफ्तार कर लिये गये थे। उन्हें वहां की जेल में रखा गया था फिर कुछ दिनों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। 22 जून को उनकी अचानक तबीयत खरीब हो गई और 23 जून को रहस्यमय परिस्थिति में उनकी मौत हो गई। 

 

 

 

 

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