हैदरपोरा मुठभेड़ : उमर अब्दुल्ला ने दिया धरना, परिजनों को शव लौटाने की मांग

श्रीनगर | हैदरपोरा में सोमवार को हुई कथित मुठभेड़ ने कश्मीर में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। विभिन्न राजनीतिक और गैर-राजनीतिक संगठनों ने मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है। मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से दो के शव उनके परिवारों को सौंपने की मांग की जा रही है। इस मुद्दे पर विरोध जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला गुरुवार को धरने पर बैठे, कांग्रेस के दिग्गज नेता सैफुद्दीन सोज ने राज्यपाल को पत्र लिखा और कई अन्य दलों ने मार्च निकाला।

पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ उमर अब्दुल्ला श्रीनगर के सोनवार इलाके में चौराहे पर धरने पर बैठ गए।

जब पत्रकारों ने उमर से मुठभेड़ की मजिस्ट्रियल जांच कराने के उपराज्यपाल के फैसले पर उनकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, “मेरा उस मजिस्ट्रेट जांच से कोई लेना-देना नहीं है। अगर मुझे इससे कुछ लेना-देना होता, तो मैं नहीं यहां धरने पर नहीं बैठा होता।”

उन्होंने कहा, “मेरी मांग है कि इस मुठभेड़ में मारे गए नागरिकों के शव उनके परिवारों को लौटाए जाएं।”

हैदरपोरा मुठभेड़ पर पुलिस के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए, उमर अब्दुल्ला ने कहा, “मैं अभी भी यह नहीं समझ पा रहा हूं कि हाइब्रिड आतंकी शब्द का क्या अर्थ है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं 6 साल तक मुख्यमंत्री रहा। मैंने एकीकृत मुख्यालय की बैठकों का नेतृत्व किया और खुफिया रिपोर्ट प्राप्त की। मैंने हाइब्रिड आतंकवादी शब्द कभी नहीं सुना।”

हैदरपोरा की घटना की निंदा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज ने कहा कि उन्होंने एलजी को एक पत्र लिखा है।

सोज ने कहा, “आज, मैंने माननीय उपराज्यपाल, श्री मनोज सिन्हा को हाल ही में हैदरपोरा मुठभेड़ के बारे में ²ढ़ता से लिखा है और इससे संबंधित तथ्यों के आधार पर जनता की धारणा को उनके ध्यान में लाया है।”

उन्होंने कहा, “अपने पत्र में, मैंने उपराज्यपाल से कहा कि हत्याओं को टाला जा सकता था, अगर प्रशासनिक तंत्र के प्रतिनिधियों ने प्रतिक्रिया के लिए तथ्यों को जानने का तरीका अपनाया होता, जो कि बड़े पैमाने पर जनहित में होता।”

सोज ने अपने बयान में कहा, “मैंने इस तथ्य पर बहुत जोर दिया कि निर्दोष नागरिकों की हत्याएं एक बड़ा पाप है, खासकर जब हत्याओं ने सामाजिक-अशांति को उकसाया हो।”

सोज ने आगे कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल से कहा है कि प्रकरण के साक्ष्य स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि हत्याओं को टाला जा सकता था।

उन्होंने कहा, “मैंने उनसे इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया है, ताकि व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए तथ्य सामने आ सकें।”

उन्होंने आगे कहा, “इस बीच, मैंने उपराज्यपाल से यह भी अनुरोध किया है कि मारे गए अल्ताफ अहमद भट, डॉ. मुदासिर गुल और आमिर अहमद के शव तुरंत संबंधित परिवारों को सौंपे जाएं, जिसके लिए वे प्रशासन से लगातार अनुरोध कर रहे हैं।”

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने भी हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए नागरिकों के शवों की वापसी और मामले की एक सेवारत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच शुरू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अब्दुल गनी वकील ने कहा कि हैदरपोरा मुठभेड़ पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

Related Posts

आखिर 38 मौतों के सौदागर का संरक्षक कौन है?

सागर शराब त्रासदी मौतों के पीछे किसका संरक्षण,…

Continue reading
पंजाब सीएम के OSD के खिलाफ CBI जांच पर सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कब होगी सुनवाई?

पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

‘अखिलेश जी ड्रामा नहीं हिसाब दीजिए’, JPNIC को लेकर OP राजभर ने सपा चीफ को घेरा

‘अखिलेश जी ड्रामा नहीं हिसाब दीजिए’, JPNIC को लेकर OP राजभर ने सपा चीफ को घेरा

अग्निवीर के पहले बैच को कहां मिलेगी नौकरी, किस राज्य में क्या नियम?

अग्निवीर के पहले बैच को कहां मिलेगी नौकरी, किस राज्य में क्या नियम?

नोएडा प्राधिकरण में भ्रष्टाचार व्याप्त 

नोएडा प्राधिकरण में भ्रष्टाचार व्याप्त 

अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री के दौरे से भड़का लोगों का विरोध!

अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री के दौरे से भड़का लोगों का विरोध!

‘BJP ने इमरजेंसी को पीछे छोड़ दिया’, CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले आशुतोष रांका

‘BJP ने इमरजेंसी को पीछे छोड़ दिया’, CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले आशुतोष रांका

क्या आधुनिक जन-आंदोलन गांधी के सत्याग्रह के मानकों पर खरे उतरते हैं?

क्या आधुनिक जन-आंदोलन गांधी के सत्याग्रह के मानकों पर खरे उतरते हैं?