शहीदे आजम भगत सिंह और डा. लोहिया ने जो वैचारिक मशाल जलाई, उसे आगे बढ़ाने की जरूरत  

देवेंद्र अवाना 

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भारत के वे सच्चे सपूत थे, जिन्होंने अपनी देशभक्ति और देशप्रेम को अपने प्राणों से भी अधिक महत्व दिया और मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर कर गए। 23 मार्च यानि, देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर करने वाले तीन वीर सपूतों का शहीद दिवस। यह दिवस न केवल देश के प्रति सम्मान और हिंदुस्तानी होने वा गौरव का अनुभव कराता है, बल्कि वीर सपूतों के बलिदान को भीगे मन से श्रृद्धांजलि देता है।

उन अमर क्रांतिकारियों के बारे में आम मनुष्य की वैचारिक टिप्पणी का कोई अर्थ नहीं है। उनके उज्ज्वल चरित्रों को बस याद किया जा सकता है कि ऐसे मानव भी इस दुनिया में हुए हैं, जिनके आचरण किंवदंति हैं। भगत सिंह ने अपने अति संक्षिप्त जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उनके बाद अब किसी के लिए संभव न होगी।
देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया जिनमें से एक थे डॉ. राममनोहर लोहिया जी। अगर जयप्रकाश नारायण ने देश की राजनीति को स्वतंत्रता के बाद बदला तो वहीं डॉ लोहिया ने देश की राजनीति में भावी बदलाव की बयार आजादी से पहले ही ला दी थी। अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के कारण वह अपने समर्थकों के साथ ही अपने विरोधियों के मध्‍य भी अपार सम्मान हासिल किया।

डॉ राममनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को फैजाबाद में हुआ था। उनके पिताजी हीरालाल पेशे से अध्यापक व हृदय से सच्चे राष्ट्रभक्त थे। उनके पिताजी गांधीजी के अनुयायी थे। जब वे गांधी जी से मिलने जाते तो डॉ लोहिया को भी अपने साथ ले जाया करते थे। इसी से उन्होंने प्रेरणा लेकर समाजवादी आंदोलन का आगाज किया था।
आज की परिस्थितियों में समाजवादी आंदोलन चलाने के लिये डॉ लोहिया की जरूरत है। आज शारीरिक रूप से डॉ लोहिया हमारे बीच नही है, परंतु उनके विचार उनके आंदोलन चलाने के तौर तरीके व साथ साथ आम जनता की पीड़ा को समझकर मजबूती से उठाने के लालायित रहने का उल्लेख किताबों में है अब बस उसे धरातल पर कुरेदने की जरूरत है।मुझे पूर्ण विश्वास है आज बढ़ती महँगाई, राजनीति में पूंजीवाद व अफसरशाही का दखल अमीरी गरीबी के बीच बढ़ती खाई एक दूसरे से नफरत के इस दौर को डॉ लोहिया के विचारों को अमल में लाने से हो देश समाज से इन बुराई से पीछा छुट सकता है। आओ हम सब भारतीय सोशलिस्ट मंच के कल्याणकारी मित्रगण मिलकर नफरत के इस दौर को समाप्त करे फिर मोहब्बत के आशियाने को सवारे फिर भारत को सोने की चिड़िया बनाने का ताना बाना बुने।

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