तो अयोध्या में पहुंचते ही अखिलेश के समाजवाद पर चढ़ गया भगवा रंग! 

चरण सिंह राजपूत 
जिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम को हिन्दू समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है। वे राम हमारे देश में मात्र वोटबैंक की राजनीति तक सिमट कर रह गये हैं। यह राम मंदिर ही था कि आज भाजपा दूसरी बार प्रचंड बहुमत से देश पर राज कर रही है। उत्तर प्रदेश में तो जैसे बिना राम के सत्ता मिल ही नहीं सकती। यही वजह है कि जो अखिलेश यादव भगवा रंग पर कटाक्ष करते हुए भाजपा को घेरते रहे हैं। मोदी और योगी सरकार पर देश के भगवाकरण करने का आरोप लगाते रहे हैं। वे ही अखिलेश यादव के अयोध्या में पहुंचते ही उनके समाजवाद पर भगवा रंग हावी हो गया। ऊपर से गदा हाथ में उठा ली। उनके मंच पर बाकायदा पंडित जी शंखनाद करते हुए दिखाई दिए। तो क्या अखिलेश यादव भी भाजपा की तरह भेष बदलने की राजनीति करने लगे हैं। हमारे देश में तो समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को एक दूसरे का पूरक माना जाता है। जो भगवा रंग हमेशा समाजवाद को  चिढ़ाता रहा तो क्या सत्ता मोह ने अखिलेश यादव को उस भगवा रंग को अपनाने के लिए मजबूर कर दिया। समाजवादी पूरी जिंदगी धर्मनिरपेक्षता के लिए लड़ते रहे। जेपी क्रांति के आह्वान पर 1977 में बनी जनता पार्टी की सरकार में मधु दंडवते, मधु लिमये जैसे समाजवादियों ने जनता पार्टी और सरकार में शामिल जनसंघ के नेताओं का विरोध इसलिए किया था क्योंकि उन्होंने आएसएस की भी सदस्यता भी ले रखी थी। आरएसएस का मतलब भगवा रंग। आरएसएस के नागपुर स्थित मुख्यालय पर तो राष्ट्रीय पर्वों पर भी तिरंगे की जगह भगवा झंडा फहराया जाता रहा है।
 यह समाजवाद के प्रति प्रतिबद्धता ही थी कि अखिलेश जिन मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं उन्होंने संविधान और समाजवाद के लिए राम मंदिर निर्माण में पहुंचे कारसेवकों पर गोली चलवाने का आरोप भी झेला। मतलब उन्होंने कानून और संविधान के लिए विवादित ढांचे को नहीं गिरने दिया। वह बात दूसरी है कि आज वे उसी ढांचे को गिराने वालों से गलबहिंया कर रहे हैं। कभी अखिलेश यादव ब्राह्मणों को खुश करने के लिए अखिलेश यादव परशुराम का मंदिर बनवाने की बात करते हैं तो कभी उनके सपने में आकर श्रीकृष्ण के उनकी सरकार बनवाने की बात कहने की बात करते हैं। वैसे भी समजवादी पार्टी का समाजवाद तो बंगलों में बंधक हो चुका है। जो पार्टी विवादित ढांचे के विध्वंस में मुख्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को सांसद और उनके बेटे राजबीर सिंह को मंत्री बनवा सकती है तो उस पार्टी के कर्णधार कुछ भी कर सकते हैं। तो क्या अखिलेश यादव वोट के लिए जय श्रीराम के नारे भी लगाएंगे। वैसे भी अयोध्या में गदा उठाने का मतलब हनुमान बनना। और हनुमान तो जय श्रीराम के अलावा कुछ जानते ही नहीं थे। तो क्या सभी दल सत्ता के लिए भाजपा के दिखाए रास्ते पर चल पड़े हैं। कांग्रेस के राहुल गांधी भी समय समय पर मंदिरों की परिक्रमा करते देखे जाते हैं।
दरअसल यूपी में विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए शुक्रवार को अखिलेश यादव धर्म नगरी अयोध्या पहुंचे थे। इस दौरान वह पूरी तरह से राम भक्ति में रंगे नजर आए।  गदा थामे नजर आएं अखिलेश ने 4 ट्वीट किए हैं। इसमें एक ट्वीट में उन्होंने फोटो शेयर करते हुए लिखा कि , “आज अयोध्या से हुआ शंखनाद, होगा ‘सर्वकल्याण’ हेतु बदलाव।” अखिलेश यादव ने जिस फोटो को शेयर किया उसमें अखिलेश यादव के साथ एक संत नजर आ रहे हैं, जो शंख बजा रहे हैं। साथ ही अखिलेश यादव खुद एक बड़ा सा गदा थामे नजर आ रहे हैं। अखिलेश के साथ अयोध्या से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी पवन पांडे भी हैं। अखिलेश यादव को अयोध्या के संतो ने हनुमान जी की मूर्ति भी भेंट की। अखिलेश यादव इस दौरान राम नाम का भगवा चोला ओढ़े नजर आएं।
दरअसल अयोध्या से सपा ने तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे को प्रत्याशी बनाया है। अयोध्या में पंडितों को रिझाने के लिये अखिलेश यादव ने यह सब कुछ किया है।

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