हालांकि, सरकारी सूत्रों और अन्य समाचारों के अनुसार, मृतकों की संख्या 37 बताई गई है, जिनमें से 36 की पहचान हो चुकी है, और 35 परिवारों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किया गया है। एक मृतक की पहचान नहीं हो पाई, और एक अन्य का कोई वारिस न होने के कारण मुआवजा नहीं भेजा गया।
कुछ परिवारों ने शिकायत की है कि उन्हें घोषित 25 लाख रुपये के बजाय केवल 2.5 लाख रुपये मिले, और प्रशासन ने शेष राशि के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उदाहरण के लिए, शर्मला रुइदास, जिनके पति बिनोद रुइदास की मौत हुई, ने बताया कि उन्हें 2.5 लाख रुपये नकद दिए गए, लेकिन बाकी राशि के बारे में कोई लिखित दस्तावेज नहीं मिला।
विपक्षी नेताओं, जैसे समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव और यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय राय, ने सरकार पर मौतों का सही आंकड़ा छिपाने और मुआवजे के वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासनिक लापरवाही और मृतकों की सूची जारी न करने के कारण पारदर्शिता की कमी है।
नकद मुआवजे पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई परिवारों को 5 लाख रुपये कैश में दिए गए, बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज के, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि मुआवजा पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से नहीं दिया गया।
निष्कर्ष: बीबीसी की रिपोर्ट और सरकारी आंकड़ों में मृतकों की संख्या को लेकर बड़ा अंतर है। जहां बीबीसी 82 मौतों का दावा करती है, वहीं सरकार 37 की पुष्टि करती है। मुआवजे के वितरण में भी असमानताएं सामने आई हैं, विशेष रूप से नकद भुगतान और सूची में नाम न होने की शिकायतें। इस मामले में चल रही न्यायिक जांच की रिपोर्ट से और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
सावधानी: यह जानकारी विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है, लेकिन X पोस्ट और कुछ वेब स्रोतों पर आधारित दावे पूरी तरह से सत्यापित नहीं हैं। सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक सरकारी बयानों और जांच रिपोर्ट का इंतजार करें।








