336वीं किसान पंचायत संपन्न : किसानों की आत्महत्या मुक्त भारत बनाने का किसान संगठनों का संकल्प

झारखंड में पिछले 10 साल में 45 लाख आदिवासियों का विस्थापन हुआ

हरियाणा में पिछले 1 साल में 2 लाख एकड़ भूमि छीनी गई

किसान संघर्ष समिति द्वारा हर माह आयोजित की जाने वाली 336वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। किसान नेताओं का स्वागत करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि देश भर में किसान संगठनों द्वारा एमएसपी की कानूनी गारंटी, बिजली सुधार विधेयक, बीज विधेयक, कर्ज मुक्ति, भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष चल रहे हैं लेकिन यह तब ही सफल होगा जब किसान संगठनों में किसानों की व्यापक भागीदारी होगी तथा मजबूत संयुक्त किसान मोर्चा पंचायत स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक बनेगा।
उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्या मुक्त भारत होना हमारा लक्ष्य होना चाहिए क्योंकि 2014 के बाद से प्रतिदिन 14 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। किसान पंचायत को महाराष्ट्र से अ.भा.किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीरसागर, हरियाणा से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीतसिंह, पंजाब से पंजाब किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रूलदू सिंह मानसा, राज्य कमेटी सदस्य जसबीर कौर, उत्तर प्रदेश से क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत, छत्तीसगढ़ से भाकियू के महासचिव तेजराम विद्रोही, गुजरात से किसान क्रान्ति के अध्यक्ष भरतसिंह झाला, सीहोर से अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाददास बैरागी, रायसेन से किसान जागृति संगठन प्रमुख इरफ़ान जाफरी, सागर से भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर, भोपाल से अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के विजय कुमार, रीवा से किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड शिव सिंह, इंदौर से मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, सिंगरौली से जिला अध्यक्ष एड अशोक सिंह पैगाम आदि शामिल हुए। किसान पंचायत का संचालन प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव द्वारा किया गया। किसान पंचायत का सीधा प्रसारण बहुजन संवाद पर किया गया।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए कॉ. राजन क्षीरसागर ने कहा कि सरकार द्वारा जुल्म ढहाने वाले कानून किसानों पर थोपे जा रहे हैं। भूमि अधिग्रहण के कानून को बाईपास कर गैर तरीके से कॉर्पोरेट को भूमि सौंप कर किसानों पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में पिछले 10 सालों में 45 लाख किसान विस्थापित हो चुके हैं। पूरे देश में 2 करोड़ किसानों ने अपनी जमीनें गवाई है। कां. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में अतिवृष्टि से भारी नुक़सान हुआ है। हरियाणा के किसानों को रबी फसल की बुवाई के पहले मुआवजा की उम्मीद थी। 5 लाख 29 हजार किसानों ने पोर्टल पर नुकसान अपलोड कराया है। 31 लाख एकड़ की फसल का नुकसान हुआ है लेकिन सरकार द्वारा राजस्व विभाग पर दबाव डालकर केवल 50 हजार किसानों का ही मुआवजा स्वीकृत कराया है। 31 लाख एकड़ में से 1 लाख 20 हजार एकड़ की फसल का ही नुकसान माना गया है जिससे किसानों में नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि बीज विधेयक और बिजली विधेयक 25 दोनों ही किसानों के लिए घातक है। यह किसानों के बीज रखने के अधिकार और खाद्य सुरक्षा पर हमला है । बीज किसानों की विरासत है जिस पर सरकार कार्पोरेट का कब्जा कराना चाहती है ।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एक साल में 2 लाख एकड़ भूमि गैर कृषि उपयोग के लिए दे दी है।
रूलदू सिंह मानसा ने कहा कि बीज विधेयक को लेकर पंजाब के सभी किसान संगठन एकजुट है। इन दोनों विधेयकों को रद्द कराने के लिए बैठकें कर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
जसबीर कौर नट ने कहा कि जिस तरह तीन कृषि कानूनों को रद्द कराया है वैसे ही दोनों विधेयकों को वापस लेने को सरकार को मजबूर करेंगे। तेजराम विद्रोही ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 3100 रूपये प्रति क्विंटल पर धान खरीद का वादा किया था।
सरकार ने 160 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है लेकिन अभी तक 50 प्रतिशत भी धान खरीद नहीं हो सकी है। एग्री स्टेट पोर्टल पर पंजीयन में कई किसानों के नाम छोड़ दिए गए हैं। गिरदावली भी सही दर्ज नहीं की गई है जिससे किसानों की पूरी उपज की खरीद होना संभव नहीं है।
किसानों के जल, जंगल, जमीन की लूट भारी पैमाने पर की जा रही है। उद्योगों को जमीन देने के लिए किसानों और आदिवासियों का दमन किया जा रहा है।  प्राकृतिक संपदा पर कार्पोरेट की नजर टिकी हुई है। वहां उद्योगपतियों को बसाने के लिए सरकार उद्योगपतियों को जमीनें सौंप रही है।
अलीगढ़ से क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत ने कहा कि स्मार्ट मीटर असंगठित वर्गों के लोगों के घरों में लगाए जा रहे हैं ताकि बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध न हो सके।
एड शिव सिंह ने कहा कि सिंगरौली इलाके में आदिवासी किसानों की हजारों एकड़ जमीन अडानी सहित तमाम उद्योगपतियों को सौंप दी गई तथा हजारों फलदार इमारती वृक्षों का कत्लेआम किया गया। बीजेपी सरकार पूरे इस खेल में शामिल है। आदिवासी किसानों के हक की लड़ाई में संयुक्त किसान मोर्चा को कड़ा कदम उठाना चाहिए।
एड आराधना ने कहा कि बीज विधेयक हमारे परंपरागत बीज की सुरक्षा को खत्म करने वाला है। बीज विधेयक अधिनियम की धारा 14 में बीज इंस्पेक्शन का उल्लेख किया गया है जिसमें यदि किसान अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन नहीं करता है तो उसकी फसल जप्त कर ली जाएगी। जिस फसल का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा वह फसल भी बाजार में नहीं बिक सकेगी । बीज बेचने के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा तथा सारे दस्तावेज अपलोड करने होंगे जबकि वास्तविकता यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में न तो नेटवर्क मिल पाता है, न ही किसान इस तकनीक को जानता है
प्रहलाद दास बैरागी ने कहा कि बीज विधेयक 25 के पास होने से किसानों और देश की खाद्यान्न समस्या को बढ़ाएगा, कृषि की लागत में वृद्धि होगी। बहुराष्ट्रीय कंपनियां जी एम बीज को बढ़ावा देगी जिससे कृषि के साथ मानव जीवन भी संकट में पड़ जाएगा।
इरफ़ान जाफरी ने कहा कि मध्यप्रदेश में खाद का संकट अभी भी बरकरार है। गुना जिले में खाद की लंबी लाइन में दो दिन से इंतजार कर रही 50 वर्षीय आदिवासी महिला भुरिया बाई की ठंड और स्वास्थ्य बिगड़ने से मौत हो गई। जिसका अभी तक सरकार ने परिजनों को मुआवजा नही दिया है।
विजय कुमार ने कहा कि पारंपरिक बीज को संरक्षित करने के किसान के ज्ञान को ताक पर रखकर नया बीज विधेयक लाया जा रहा है, जिससे किसान बीज के लिए कंपनियों पर आश्रित हो जाएगा।
संदीप ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री एक ओर देश की जनता से मां के नाम एक पेड़ लगाने की बात करते हैं वहीं दूसरी ओर पूरा का पूरा जंगल काटने के लिए अडानी को दिया जा रहा है।
रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि देश के किसानों और मजदूरों को संगठित होकर सरकार को माकूल जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि इंदौर में भूमि अधिग्रहण के नाम पर 20 – 22 गांवों की एक करोड़ रुपए प्रति बीघा की जमीन अधिग्रहित की जा रही है लेकिन मुआवजे के नाम पर मात्र 4 लाख रुपए प्रति बीघा मुआवजा दिया जा रहा है। यह किसानों की लूट है।
एड अशोक सिंह पैगाम ने कहा कि सरकार द्वारा सिंगरौली में अडानी को आदिवासियों की जल, जंगल जमीन की लूट की छूट दी जा रही है। भूमि बचाने हेतु संघर्ष करने वाले आदिवासियों को डराया धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिंगरौली के आदिवासियों की लूट का मुद्दा राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।
भरतसिंह झाला कि किसान आत्महत्याएं कई दशकों से कर रहे है लेकिन सरकार इसके पीछे के कारणों पर ग़ौर करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
किसान पंचायत में सर्वसम्मति से निम्न प्रस्ताव पारित किए गए—
* बीज विधेयक और बिजली सुधार विधेयक वापस लिया जाए ।
* प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर रोक लगाई जाए।
* सिंगरौली में धिरौली कोल ब्लॉक आवंटन रद्द किया जाए।
* कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए।
* किसान आत्महत्या मुक्त भारत बने।

  • Related Posts

    भारत-अमरीका कृषि व्यापार समझौता किसानों की बर्बादी लाएगा
    • TN15TN15
    • March 5, 2026

    किसान संघर्ष समिति का होली मिलन कार्यक्रम संपन्न…

    Continue reading
    साम्राज्यवादी मंसूबे पूरा करने अमेरिका दूसरे देशों को युद्ध भूमि बना रहा : अजय खरे
    • TN15TN15
    • March 3, 2026

    भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन नीति पर चलकर विश्व शांति…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    गुनाह कोई करे शर्मिंदगी सबको उठानी पड़े!

    • By TN15
    • March 7, 2026
    गुनाह कोई करे शर्मिंदगी सबको उठानी पड़े!

    क्या भारत में वाकई होने वाली है रसोई गैस की किल्लत ?

    • By TN15
    • March 7, 2026
    क्या भारत में वाकई होने वाली है रसोई गैस की किल्लत ?

     पाकिस्तान अभी ईरान की जंग में सीधे नहीं कूद रहा है!

    • By TN15
    • March 7, 2026
     पाकिस्तान अभी ईरान की जंग में सीधे नहीं कूद रहा है!

    स्वस्थ जीवन, सबसे बड़ा धन!

    • By TN15
    • March 7, 2026
    स्वस्थ जीवन, सबसे बड़ा धन!

    RCP सिंह की PM मोदी से बड़ी अपील, ‘नीतीश कुमार केंद्र में जा रहे हैं तो उन्हें मिले बड़ा दायित्व 

    • By TN15
    • March 6, 2026
    RCP सिंह की PM मोदी से बड़ी अपील, ‘नीतीश कुमार केंद्र में जा रहे हैं तो उन्हें मिले बड़ा दायित्व 

    ईरानी ड्रोन अटैक से पस्त हुआ अमेरिका? सेना के अधिकारियों ने बंद कमरे में क्या बताया ?

    • By TN15
    • March 6, 2026
    ईरानी ड्रोन अटैक से पस्त हुआ अमेरिका? सेना के अधिकारियों ने बंद कमरे में क्या बताया ?