243 सीटों पर महागठबंधन के 254 उम्मीदवार, NDA को घेरने में तेजस्वी खुद तो नहीं फंस रहे?

हाँ, तेजस्वी यादव की रणनीति में एक बड़ा उल्टा असर पड़ रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के नामांकन भरने के अंतिम दिन (20 अक्टूबर) महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी, भाकपा-माले आदि) ने बिना सीट बंटवारे के ही कुल 254 उम्मीदवार उतार दिए, जबकि कुल सीटें सिर्फ 243 हैं। इससे 11-12 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ की स्थिति बन गई है, जहाँ गठबंधन के ही दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। उदाहरण के लिए:

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सीटफ्रेंडली फाइट के दलकहलगांवआरजेडी vs कांग्रेससिकंदराआरजेडी vs कांग्रेसनरकटियागंजआरजेडी vs कांग्रेसवैशालीआरजेडी vs कांग्रेससुल्तानगंजआरजेडी vs कांग्रेसगौड़ाबौरामआरजेडी vs वीआईपीबछवाड़ाकांग्रेस vs सीपीआईकरहरकांग्रेस vs सीपीआईबिहारशरीफकांग्रेस vs सीपीआईराजापाकरकांग्रेस vs सीपीआईरोसड़ासीपीआई vs अन्य
क्यों हुई यह भूल?

सीट शेयरिंग में खींचतान: महागठबंधन में सीट बंटवारा तय नहीं हो सका। आरजेडी ने सबसे ज्यादा 143 सीटों पर दावेदारी जताई, कांग्रेस ने 60-61, भाकपा-माले ने 20, वीआईपी ने 15, सीपीआई ने 9, सीपीएम ने 4 और आईआईपी ने 3। तेजस्वी की अगुवाई वाली आरजेडी ने अपनी ताकत दिखाने के चक्कर में ज्यादा उम्मीदवार उतारे, लेकिन बाकी दलों ने भी पीछे नहीं हटे।
रणनीतिक जोखिम: यह ‘ओवर-नॉमिनेशन’ की पुरानी चाल थी, ताकि बाद में नाम वापसी से समायोजन हो सके। लेकिन नामांकन भरने की डेडलाइन (20 अक्टूबर) निकल चुकी है, और अब नाम वापसी की आखिरी तारीख 24 अक्टूबर है। कुछ सीटों पर वापसी हो रही है (जैसे लालगंज में कांग्रेस के आदित्य राजा ने वापस लिया), लेकिन ज्यादातर जगह कलह बरकरार है।

तेजस्वी खुद फंस क्यों रहे?
तेजस्वी यादव महागठबंधन के सीएम फेस हैं और उन्होंने एनडीए को बेरोजगारी, महंगाई व भ्रष्टाचार पर घेरने की कोशिश की। लेकिन यह आंतरिक अव्यवस्था उनकी ही छवि को नुकसान पहुँचा रही है:

एकता पर सवाल: एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) इसे ‘गठबंधन में गांठ’ बता रहा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि मतदाता इस ‘अंदरूनी लड़ाई’ को देख रहे हैं, जो महागठबंधन को कमजोर कर रही है। जेडीयू के संजय झा ने राहुल गांधी को ‘पॉलिटिकल टूरिस्ट’ तक कह दिया।
बगावतें बढ़ीं: पप्पू यादव ने गठबंधन तोड़ने की धमकी दी और लालू प्रसाद से ‘गठबंधन धर्म’ निभाने की अपील की। कुछ नाराज उम्मीदवारों (जैसे रितु जायसवाल) ने निर्दलीय नामांकन भर दिया। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे ‘राजनीतिक अराजकता’ बता रहे हैं, जहाँ 12 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ गठबंधन की कमजोरी उजागर कर रही है।
चुनावी नुकसान का खतरा: इन फ्रेंडली फाइट्स से वोट स्प्लिट हो सकता है, जो एनडीए को फायदा देगा। तेजस्वी को अब नाम वापसी और समायोजन पर फोकस करना पड़ेगा, लेकिन देरी से उनकी ‘मजबूत लीडर’ वाली इमेज खराब हो रही है। अगर यह कलह बनी रही, तो महागठबंधन की वोट शेयरिंग प्रभावित हो सकती है, खासकर उन 11-12 सीटों पर जहाँ ज्यादातर आरजेडी-कांग्रेस टकराव है।

संक्षेप में, एनडीए को घेरने की कोशिश में तेजस्वी की यह चाल उलटी पड़ गई। 24 अक्टूबर तक नाम वापसी से कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह गठबंधन की एकजुटता पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है। बिहार की जनता अब देख रही है कि कौन सच्ची एकता दिखा पाता है।

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