स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओंकार नाथ खरे को जन्म शताब्दी वर्ष दौरान नए साल पर याद किया गया

देश की आजादी के आंदोलन में सामाजिक और सांप्रदायिक एकता की अहम भूमिका रही : अजय खरे

रीवा । ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओंकार नाथ खरे के जन्म शताब्दी वर्ष पर उनकी पावन स्मृति में नव वर्ष के प्रथम दिन 1 जनवरी को समता सम्पर्क अभियान, नारी चेतना मंच, विंध्यांचल जन आंदोलन, समाजवादी कार्यकर्ता समूह, कौमी एकता कमेटी और गरीब बचाओ संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में शहर के अमहिया मोहल्ला वार्ड नंबर 23 स्थित ललऊ घाट के पास सद्भाव सम्मेलन सम्पन्न हुआ । कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रसिद्ध भजन ईश्वर अल्लाह तेरो नाम एवं वैष्णो जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे का पाठ नारी चेतना मंच की पूर्व अध्यक्ष डॉ श्रद्धा सिंह ने किया। वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओंकारनाथ खरे के योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि आजादी आंदोलन के दौर में वंदे मातरम और भारत मां की जय बोलने पर बेंतों की सजा और जेल होती थी तब वह इनका क्रांतिकारी उद्घोष करते थे। उन्होंने देश की आजादी के लिए 17 वर्ष की उम्र में 13 माह तक कठोर जेल यातनाएं सहीं। इसके अलावा उन्हें 31 बेंतों की सजा भी सुनाई गई। वह नंगे बदन लगाई जाने वाली हर बेंत पर इंकलाबी उद्घोष करते रहे। 21वीं बेंत पर लहू-लहान हो उनके बेहोश हो जाने पर बाकी सजा रोक दी गई। विंध्य क्षेत्र के समाजवादी आंदोलन की स्थापना में उन्होंने मुखर नेतृत्व दिया। देश की आजादी के समय सन् 1947 में उन्होंने रीवा के ऐतिहासिक दरबार कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में प्रतिद्वंद्वी कुंवर अर्जुन सिंह को भारी मतों से पराजित किया था। वह एक अच्छे प्रशासक भी थे लेकिन आजाद भारत में उन्हें अन्यायी व्यवस्था ने बहुत तंग किया लेकिन उन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।

इस अवसर पर समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि देश के आजादी के आंदोलन को सामाजिक धार्मिक सद्भाव के चलते मजबूती मिली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ करो या मरो का नारा दे रहे थे तो कुछ लोग सावरकर के द्वि-राष्ट्रवाद की वकालत करते हुए देश के विभाजन की नींव रख रहे थे। देश के दुर्भाग्यपूर्ण बंटवारे के लिए यही लोग जिम्मेदार हैं। इसी विचारधारा के लोग आज भी नफरत फैला रहे हैं। आज देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखने के लिए नफरत का माहौल खत्म करने की जरूरत है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला पंचायत सतना के पूर्व सदस्य समाजवादी नेता वीरेंद्र सिंह, साहित्यकार मनसंतोष , समाजवादी नेता प्रदीप पाण्डेय, फारवर्ड ब्लॉक के प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कर्चूली, नारी चेतना मंच की वरिष्ठ नेत्री नूरजहां, शमशाद, सावित्री श्रीवास्तव ,समाजसेवी महीप पाण्डेय, जिला अधिवक्ता संघ सदस्य सतीश कुशवाहा एडवोकेट, युवा नेता परिवर्तन पटेल, सुभाष सोनी ,रामकुमार कुशवाहा (छिबौरा) आदि की भागीदारी रही। कार्यक्रम संयोजक गफूर खान ने सद्भाव सम्मेलन के अंत में उपस्थित सभी लोगों को धन्यवाद देते हुए आभार प्रदर्शन किया।

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