सोनिया गांधी ने मिडिल ईस्ट में चल रहे इजरायल-ईरान संघर्ष पर भारत सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। उन्होंने ‘एक अंग्रेजी अख़बार में लिखे अपने लेख में कहा कि गाजा में तबाही और ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई गैर-कानूनी है।
उन्होंने भारत की कूटनीतिक और नैतिक परंपराओं से इस चुप्पी को विचलन बताया, जो भारत को शर्मिंदा करने वाला है। सोनिया ने कश्मीर मुद्दे पर ईरान के समर्थन को याद करते हुए कहा कि भारत को सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तनाव कम करने और शांति को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट रूप से बोलना चाहिए। उन्होंने इजरायल को पश्चिमी शक्तियों से बिना शर्त समर्थन मिलने के कारण दंडमुक्ति का माहौल बनने की भी आलोचना की।
भारत के लिए यह स्थिति जटिल है, क्योंकि इजरायल के साथ रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं, जबकि ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह जैसे रणनीतिक हित जुड़े हैं। भारत ने दोनों देशों में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन सिंधु’ शुरू किया है और तेहरान छोड़ने की सलाह दी है।
सोनिया गांधी का यह बयान भारत की संतुलित विदेश नीति पर सवाल उठाता है, जो इजरायल और ईरान दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश करती है।








