इजरायल में सेना (IDF) में अनिवार्य सेवा (आमतौर पर 2-3 साल) पूरी करने के बाद बहुत से युवा इजरायली (खासकर यहूदी) “डिकंप्रेस” या रिलैक्स होने के लिए भारत आते हैं। यह उनके लिए एक तरह का रिवाज (rite of passage) बन गया है, जहां वे ट्रेनिंग के तनाव से दूर शांति, नेचर, योग, और कभी-कभी पार्टी/ट्रैवल का माहौल ढूंढते हैं।
धर्मशाला/धर्मकोट को “मिनी इज़राइल” कहा जाता है क्योंकि यहां इतने इजरायली आते हैं कि साइनबोर्ड हिब्रू में दिखते हैं, फलाफेल, हम्मस, पिता जैखे इजरायली फूड के स्टॉल्स हैं, और पूरा इलाका उनकी कम्युनिटी जैसा लगता है। हर साल हजारों (करीब 30,000+) इजरायली हिमाचल (खासकर कसोल, धर्मकोट, मनाली) आते हैं। कसोल को भी “मिनी इज़राइल” कहते हैं। अन्य जगहें जैसे गोवा, पुश्कर, दिल्ली (पहाड़गंज) में भी चबाद हाउस (यहूदी कम्युनिटी सेंटर) हैं, लेकिन आर्मी ट्रेनिंग के तुरंत बाद सबसे ज्यादा धर्मशाला (या हिमाचल के इलाके) में ही जाते हैं।
यह ट्रेंड दशकों पुराना है, और कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वे यहां “पोस्ट-आर्मी ट्रिप” पर आकर महीनों-एक साल रहते हैं।






