भारतीय सोशलिस्ट मंच के उत्तर प्रदेश के प्रभारी देवेंद्र अवाना ने कहा कि आज के समय में सरकारें एक शिकारी के रूप में हैं और जनता उसके बिछाये जाल में फंसी हुई है और शिकार होने लिए तैयार है। सरकार द्वारा प्रायोजित विवाद जैसे अभी शंकराचार्य, यूजीसी में पूरा देश उलझा हुआ है। मौजूदा मुसीबत और हालात आम जनता को परेशान कर रहे हैं। गरीब, किसान, मजदूर, नौजवान, और मातृशक्ति सभी सरकार की गलत जनविरोधी नीतियों के शिकार हो रहे हैं।
राजनीतिक दलों का सिर्फ एकमात्र मकसद है उनकी सरकार कैसे बनी रहें। इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है। जनता के मुद्दों से जैसे अस्पताल में ईलाज का अभाव है,स्कूलों में पढ़ाई का अभाव स्कूल बंद है, कारखाने बंद हो रहें हैं।
राजनीतिक दलों का सिर्फ एकमात्र मकसद है उनकी सरकार कैसे बनी रहें। इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है। जनता के मुद्दों से जैसे अस्पताल में ईलाज का अभाव है,स्कूलों में पढ़ाई का अभाव स्कूल बंद है, कारखाने बंद हो रहें हैं।
नौजवानों को रोजगार नहीं है, दम तोडू महंगाई से आम नागरिक कराह रहा है। देश के 80 करोड़ नागरिक सरकारी राशन पर निर्भर है। इन सब बुनियादी आवश्यकताओं को नजर अंदाज कर हिन्दू मुस्लिम में लगे चौथे स्तंभ कहे जाने वाला बिका हुआ सरकारी प्रेस (मीडिया), उल्लू जुलूल फैसला दे रही न्यायपालिका अपनी मस्ती में चूर विधायिका,आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी कार्यपालिका और देश का भविष्य नौजवान व्हाट्सएप पर
हर हर मोदी
घर घर मोदी
हिन्दू खतरे में है
मोदी है तो मुमकिन है के नारे का उद्घोष कर रहा है।
उनका कहना है कि देश में चिकित्सा माफिया,शिक्षा माफिया,बिल्डर नेताओं व अधिकारियों दलालों के अवैध गठजोड़ की किसानों की जमीन को हड़पने की गिद्ध दृष्टि है और किसानों की जमीन लूटी जा रही है इन्हीं देशद्रोहियों ने देश की आधी से ज्यादा अर्थव्यवस्था पर कब्जा जमा लिया है। विपक्षी दलों ने तो सत्ता से गुप्त समझौता कर ही रखा है, बस उनका काम नहीं रुकना चाहिए बाकी सत्ता कुछ भी करें। देश में जनहित के आंदोलन तो सोशल मीडिया तक सीमित होकर रह गये है। सड़को के आंदोलन तो ऐसे गायब है जैसे गधे के सिर से सींग। सभी दलों के नेता चार्टर प्लेन से यात्रा करते है और दिल्ली की लुटियन जोन में बड़े बड़े बंगलों में ऐशोआराम से महाराजाओं वाली जिंदगी की मौज उड़ा रहें है। इनकी भी जनता के जरूरत पर कोई खास जवाबदेही नहीं है और ना ही कोई राजनीतिक दल इस पर बोलने को तैयार है।
ऐसी स्थिति में देश के भाईचारे,सद्भावना,समता बंधुत्व, देश की एकता के लिए कौन बोलेगा और कौन काम करेगा। सत्ता रूपी शिकारी के बिछाया जाल से कैसे देश के आम नागरिक बचे घायल लोकतंत्र और सिकुड़ते हुए गणतंत्र पर मंथन की बहुत आवश्यकता है।
हर हर मोदी
घर घर मोदी
हिन्दू खतरे में है
मोदी है तो मुमकिन है के नारे का उद्घोष कर रहा है।
उनका कहना है कि देश में चिकित्सा माफिया,शिक्षा माफिया,बिल्डर नेताओं व अधिकारियों दलालों के अवैध गठजोड़ की किसानों की जमीन को हड़पने की गिद्ध दृष्टि है और किसानों की जमीन लूटी जा रही है इन्हीं देशद्रोहियों ने देश की आधी से ज्यादा अर्थव्यवस्था पर कब्जा जमा लिया है। विपक्षी दलों ने तो सत्ता से गुप्त समझौता कर ही रखा है, बस उनका काम नहीं रुकना चाहिए बाकी सत्ता कुछ भी करें। देश में जनहित के आंदोलन तो सोशल मीडिया तक सीमित होकर रह गये है। सड़को के आंदोलन तो ऐसे गायब है जैसे गधे के सिर से सींग। सभी दलों के नेता चार्टर प्लेन से यात्रा करते है और दिल्ली की लुटियन जोन में बड़े बड़े बंगलों में ऐशोआराम से महाराजाओं वाली जिंदगी की मौज उड़ा रहें है। इनकी भी जनता के जरूरत पर कोई खास जवाबदेही नहीं है और ना ही कोई राजनीतिक दल इस पर बोलने को तैयार है।
ऐसी स्थिति में देश के भाईचारे,सद्भावना,समता बंधुत्व, देश की एकता के लिए कौन बोलेगा और कौन काम करेगा। सत्ता रूपी शिकारी के बिछाया जाल से कैसे देश के आम नागरिक बचे घायल लोकतंत्र और सिकुड़ते हुए गणतंत्र पर मंथन की बहुत आवश्यकता है।








