मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने पर विचार कर रही है, लेकिन यह पूरी तरह अमेरिकी नीतियों और प्रतिबंधों पर निर्भर करता है।
वर्तमान स्थिति
जनवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सैन्य कार्रवाई में हिरासत में लिया और देश के तेल संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ाया। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है, मुख्य रूप से अमेरिकी बाजार के लिए (जैसे $2 बिलियन मूल्य के तेल की डील)।
रिलायंस ने मार्च 2025 से वेनेजुएला से तेल आयात रोक दिया था, क्योंकि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। कंपनी की आखिरी खेप मई 2025 में आई थी।
8 जनवरी 2026 को रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा: “हम नॉन-अमेरिकी खरीदारों के लिए वेनेजुएला तेल की उपलब्धता पर स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं और नियमों का पालन करते हुए तेल खरीदने पर विचार करेंगे।”
अमेरिका का रोल क्या होगा?
अमेरिका अब वेनेजुएला के तेल बिक्री को नियंत्रित कर रहा है और चुनिंदा रूप से प्रतिबंध हटा रहा है, ताकि तेल वैश्विक बाजार में बेचा जा सके। मुख्य फोकस अमेरिकी रिफाइनरों और कंपनियों (जैसे शेवरॉन) पर है।
नॉन-अमेरिकी खरीदारों (जैसे रिलायंस) के लिए अभी स्पष्टता नहीं है। अगर अमेरिका लाइसेंस जारी करता है या आगे ढील देता है, तो रिलायंस जैसे भारतीय रिफाइनर सस्ते हैवी क्रूड (मेरे क्रूड) खरीद सकते हैं, जो जामनगर रिफाइनरी के लिए फायदेमंद है (डिस्काउंट पर $5-8 प्रति बैरल सस्ता)।
पहले भी रिलायंस को अमेरिकी वेवर मिले थे, इसलिए संभावना है कि अगर अमेरिका ग्लोबल सप्लाई बढ़ाना चाहता है, तो भारत जैसे बड़े आयातकों को अनुमति मिल सकती है।








