21 फरवरी को लखनऊ में सवर्ण समाज (सवर्ण मोर्चा के बैनर तले) ने यूजीसी (University Grants Commission) के नए नियमों के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से परिवर्तन चौक पर शुरू हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और नारेबाजी की गई।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि यूजीसी के “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” भेदभावपूर्ण हैं, जो सामान्य वर्ग (सवर्ण) के छात्रों/समाज के हितों के खिलाफ हैं। वे इसे “काला कानून” बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं। नारे जैसे “काला कानून वापस लो” और अन्य विरोधी स्लोगन लगाए गए।
पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए भारी बल तैनात किया था, जिसमें RAF भी शामिल थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ हंगामा हुआ, बैरिकेडिंग तोड़ी गई, और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। कुछ रिपोर्ट्स में पुलिस से धक्का-मुक्की और प्रदर्शनकारियों द्वारा कपड़े उतारने जैसे कदमों का जिक्र है।
यह मुद्दा जनवरी 2026 से चल रहा है, जब UGC ने ये नियम अधिसूचित किए थे। नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव रोकना, Equal Opportunity Centres और Equity Committees बनाना, और SC/ST/OBC छात्रों के लिए शिकायत निवारण तंत्र मजबूत करना है। लेकिन सवर्ण समूहों का कहना है कि ये नियम “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” को बढ़ावा देते हैं और फर्जी शिकायतों के खिलाफ कोई प्रावधान नहीं है।
इसके चलते पहले भी UP में (लखनऊ यूनिवर्सिटी सहित) बड़े विरोध हुए थे, सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में स्टे दिया था, लेकिन विरोध जारी है। आज का प्रदर्शन इसी कड़ी में है, जिसमें पूर्व PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री जैसे लोग भी शामिल हुए और BJP पर सवर्ण समाज से “छिटकने” का आरोप लगाया।








