चरण सिंह
भले ही फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी एक्ट पर रोक लगा दी हो पर इस एक्ट को लेकर वोटबैंक की राजनीति शुरू हो चुकी है। बसपा मुखिया मायावती ने यूजीसी एक्ट को लेकर सवर्ण कार्ड खेल दिया है। मायावती कि जो काम दलितों को करना चाहिए था वह सवर्ण कर रहे हैं। उनका कहना है कि दलितों का 85 फीसदी उत्पीड़न तो ओबीसी करते हैं। सवर्ण तो 12-15 फीसदी ही करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस एक्ट में दलित छात्र ओबीसी छात्रों की शिकायत नहीं कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा की कुछ दलित नेता यूजीसी एक्ट का समर्थन कर दलितों के हितों से खिलवाड़ कर कर रहे हैं। यूजीसी एक्ट को दलितों के खिलाफ बताने वाली मायावती ने कहा कि यह एक्ट दलितों के खिलाफ है। यही वजह रही कि मायावती ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी एक्ट पर रोक लगाने का समर्थन किया और कहा कि इससे शिक्षण संस्थानों का माहौल ख़राब होता।
दरअसल मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सवर्णों पर डोरे डाले हैं। वैसे भी मायावती ने हाल ही में ब्राह्मण भाईचारा सम्मेलन में 18 फीसद आरक्षण सवर्णों को आर्थिक आधार पर देने की मांग की थी।
दरअसल मायावती जानती हैं कि यूजीसी एक्ट पर रोक लगी है पर वह खत्म नहीं हुआ। मतलब सवर्ण समाज के दिमाग में यह बैठ गया है कि बीजेपी ने उनके साथ बड़ा खेल कर दिया था। मायावती सवर्णों की बीजेपी से नाराजगी को भुनाना चाहती हैं। मायावती की रणनीति है कि इन चुनाव में दलित सवर्ण गठबंधन बनाया जाए।
वैसे भी 2007 में जब मायावती ने अपने दम पर सरकार बनाई थी तो सवर्णों का समर्थन उन्हें मिला था। ब्राहण तो उन साथ एकतरफा जुड़ गए थे। तब सतीश मिश्रा को दूसरा सीएम माना जाता था। रामवीर उपाध्याय उनके कैबिनेट मंत्री थे।
ठाकुर जयवीर सिंह भी उनके बहुत करीबी थे। सवर्ण समाज में अब योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी आवाज उठने लगी है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी सांसद पुरुषोत्तम रुपाला के राजपूतों के खिलाफ आपत्ति जनक टिप्पणी करने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजपूतों की पंचायतें करने वाले ठाकुर पूरन सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा कि यूजीसी एक्ट पर योगी आदित्यनाथ को बोलना चाहिए था। उनको कहना चाहिए था कि वह अपने राज्य में यूजीसी एक्ट लागू नहीं करेंगे। ऐसे में मायावती बड़ा खेल करने जा रही है।








