मोसाद के ऑपरेशन ‘नेगेव डेजर्ट’ की कहानी जिसमें PAK के सीक्रेट ठिकाने पर कब्जे का किया गया था रिहर्सल

मोसाद के ऑपरेशन ‘नेगेव डेजर्ट’ से जुड़ी कहानी वास्तव में एक पूर्ण पैमाने के मॉक-अप (rehearsal/mock-up) की है, जिसे इजरायली एयर फोर्स (IAF) ने 1980 के दशक में नेगेव रेगिस्तान में बनाया था। यह पाकिस्तान के काहुता (Kahuta) परमाणु संयंत्र (Pakistan’s secret uranium enrichment facility) पर संभावित हवाई हमले की तैयारी के लिए था।
यह कोई आधिकारिक “मोसाद ऑपरेशन” नहीं था (मोसाद मुख्य रूप से खुफिया एजेंसी है), बल्कि इजरायली खुफिया जानकारी (Mossad/CIA/RAW से मिली) के आधार पर IAF का ट्रेनिंग एक्सरसाइज था। कई रिपोर्ट्स में इसे इजरायल-पाकिस्तान परमाणु तनाव की कहानी का हिस्सा बताया जाता है।

1980 के दशक में पाकिस्तान काहुता (अब Khan Research Laboratories के नाम से जाना जाता है) में यूरेनियम संवर्धन (enrichment) प्लांट विकसित कर रहा था, जिसे इजरायल (और भारत) एक बड़ा खतरा मानते थे। इजरायल पहले ही 1981 में ऑपरेशन ओपेरा (Babylon) के तहत इराक के ओसिराक (Osirak) रिएक्टर को नष्ट कर चुका था।
पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए इजरायल ने काहुता पर समान हवाई हमले की योजना बनाई। इसमें भारत के साथ कथित तालमेल (collusion) की भी अफवाहें थीं, हालांकि यह पूरी तरह साबित नहीं है। पाकिस्तान ने चेतावनी दी थी कि अगर काहुता पर हमला हुआ तो वह इजरायल के डिमोना (Dimona) न्यूक्लियर साइट (Negev Desert में) को निशाना बनाएगा।

नेगेव डेजर्ट में रिहर्सल की कहानी

 

\इजरायली खुफिया एजेंसियों (मोसाद सहित) और सैटेलाइट इमेजरी से काहुता फैसिलिटी की विस्तृत जानकारी इकट्ठा की गई।
नेगेव रेगिस्तान में काहुता संयंत्र का पूर्ण पैमाने का मॉक-अप (full-scale replica) बनाया गया — इसमें इमारतें, संरचनाएं, सुरक्षा व्यवस्था आदि की नकल की गई।
इजरायली F-15 और F-16 पायलट्स ने यहां मॉक अटैक (mock attacks) का अभ्यास किया। वे कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर, लक्ष्य को निशाना बनाने और हमले के तरीके का रिहर्सल करते थे।
यह रिहर्सल इराक के हमले की तरह ही था — सटीक, तेज और लंबी दूरी का मिशन।

यह अभ्यास कभी अमल में नहीं आया। कारण:

पाकिस्तान की मजबूत एयर डिफेंस और परमाणु क्षमता की चेतावनी।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक कारण।
इजरायल ने अंततः हमला रद्द कर दिया।

पाकिस्तान ने इसे “Mossad’s forgotten war on Pakistan” जैसी किताबों/रिपोर्ट्स में याद किया है, जहां मोसाद ने यूरोपीय कंपनियों को parcel bombs भेजकर ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी सप्लाई रोकने की कोशिश भी की।
महत्वपूर्ण तथ्य

यह घटना 1980 के मध्य की है (Osirak हमले के बाद)।
नेगेव डेजर्ट इजरायल का ट्रेनिंग हब है — यहां “Baladia” जैसा फेक शहर भी है शहरी युद्धाभ्यास के लिए, लेकिन काहुता मॉक-अप स्पेसिफिक था।
आज भी इजरायल के पास परमाणु अस्पष्टता (nuclear ambiguity) की नीति है, और डिमोना (Shimon Peres Negev Nuclear Research Center) उसका केंद्र है।

यह कहानी इजरायल की पूर्व-निवारक हमलों (preemptive strikes) की रणनीति को दर्शाती है — खुफिया जानकारी + सटीक रिहर्सल + हवाई हमला। असली हमला नहीं हुआ, लेकिन रिहर्सल ने IAF की क्षमता को मजबूत किया।
अगर आप इसमें कोई खास पहलू (जैसे भारत का रोल, या बाद के घटनाक्रम) जानना चाहें तो और बताएं!

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