नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेटरों ने डोनाल्ड ट्रंप को चिट्ठी लिखकर भारत से दालों पर लगे 30% टैरिफ को हटाने की मांग की है। यह चिट्ठी भारत-अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत के बीच आई है, जहां दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन और टैरिफ जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
मुख्य बातें क्या हैं?
किन सीनेटरों ने लिखी चिट्ठी? रिपब्लिकन सीनेटर Kevin Cramer और Steve Daines ने यह लेटर लिखा। किस चीज पर फोकस? भारत ने 30 अक्टूबर 2025 को yellow peas (पीली मटर) पर 30% टैरिफ लगाया, जो 1 नवंबर 2025 से लागू हुआ। अमेरिकी सीनेटरों का कहना है कि भारत दालों जैसे pulses (lentils, chickpeas, dried beans, peas) पर अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा रहा है, जिससे अमेरिकी किसानों को भारत में एक्सपोर्ट करने में नुकसान हो रहा है।
सीनेटरों की अपील: उन्होंने ट्रंप से कहा है कि भारत के साथ किसी भी ट्रेड एग्रीमेंट में pulses crops के लिए favorable provisions (अनुकूल प्रावधान) पर जोर दें। इससे अमेरिकी किसानों को फायदा होगा और भारतीय उपभोक्ताओं को भी सस्ते, हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट मिलेंगे।
सीनेटरों की अपील: उन्होंने ट्रंप से कहा है कि भारत के साथ किसी भी ट्रेड एग्रीमेंट में pulses crops के लिए favorable provisions (अनुकूल प्रावधान) पर जोर दें। इससे अमेरिकी किसानों को फायदा होगा और भारतीय उपभोक्ताओं को भी सस्ते, हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट मिलेंगे।
ट्रेड डील का बैकग्राउंड
भारत और अमेरिका के बीच फर्स्ट-फेज ट्रेड डील की बातचीत लंबे समय से चल रही है, लेकिन अभी तक फाइनल नहीं हुई। 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% तक टैरिफ (जिसमें रूसी तेल आयात के कारण अतिरिक्त 25% शामिल) लगाए, जिससे संबंधों में तनाव आया। इस बीच pulses जैसे कृषि उत्पाद प्रमुख मुद्दा बने हुए हैं, क्योंकि अमेरिका भारत को pulses एक्सपोर्ट करना चाहता है (भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल आयातक है)।
यह चिट्ठी हाल ही में (जनवरी 2026 में) लिखी गई है, ठीक जब ट्रेड नेगोशिएशंस में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि भारत अगर दालों पर ड्यूटी कम करे तो दोनों देशों को फायदा होगा।
यह खबर मुख्य रूप से AajTak और Business Today जैसी रिपोर्ट्स से आई है, जहां अमेरिकी किसानों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। भारत की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ट्रेड डील में कृषि संवेदनशील क्षेत्र रहा है। अगर ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो दालों की कीमतों और उपलब्धता पर असर पड़ सकता है – भारतीय बाजार में अमेरिकी दालें सस्ती हो सकती हैं! क्या लगता है आपको, भारत को इस मांग पर विचार करना चाहिए?
यह चिट्ठी हाल ही में (जनवरी 2026 में) लिखी गई है, ठीक जब ट्रेड नेगोशिएशंस में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि भारत अगर दालों पर ड्यूटी कम करे तो दोनों देशों को फायदा होगा।
यह खबर मुख्य रूप से AajTak और Business Today जैसी रिपोर्ट्स से आई है, जहां अमेरिकी किसानों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। भारत की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ट्रेड डील में कृषि संवेदनशील क्षेत्र रहा है। अगर ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो दालों की कीमतों और उपलब्धता पर असर पड़ सकता है – भारतीय बाजार में अमेरिकी दालें सस्ती हो सकती हैं! क्या लगता है आपको, भारत को इस मांग पर विचार करना चाहिए?






