क्या तेजस्वी यादव ने डॉ. राममनोहर लोहिया की किताब को पढ़ा?

साथी के नाम एक खत।
प्रिय साथी जयंत जिज्ञासु,
जैसा रणधीर गौतम ने तुम्हारे बारे में बताया था वैसा ही मैंने तुममे पाया। पटना मे समाजवादी समागम द्वारा आयोजित ‘कपूरी ठाकुर जनशताब्दी समारोह’ मे तुम्हारी तकरीर सुनकर तसल्ली हुई कि सोशलिस्ट विचारों के पक्षघरों की एक जमात सारे घटाटोप के बावजूद सक्रिय है। बड़ी तकलीफ के साथ मुझे कहना पड़ रहा है की सोशलिस्टो में जो मास लीडर है उनकी सबसे बड़ी कमजोरी मेरी नजर में यह है कि सत्ता के हिसाब किताब में तो वे माहिर है, जो भी कारण हो आम जनता में उनका प्रभाव भी है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव बिहार में लालू पसाद यादव या कल तक के सोशलिस्ट आज के भाजपाई नरेंद्र मोदी के पिछलग्गू नीतीश कुमार ने नई पीढ़ी में सोशलिस्ट विचार दर्शन, सिद्धांतों, नीति कार्यक्रमों मैं दीक्षित करने के लिए कभी प्रयास नहीं किया। व्यक्तिगत स्तर पर ऐसे लोगों से घिरे रहे जिन्होंने जरा सी भी मन की चाहत पूरी न होने पर मुखालफत करने में भी देरी नहीं की। आज भी बिहार और यूपी में गांव के स्तर पर अगर सोशलिस्ट कार्यकर्ताओं की चाहे मामूली हाजरी हो, परंतु वे 50-60 साल बीतने के बाद भी सोशलिस्ट तहरीक से बंधे हुए हैं। विचार की आंच इंसान को ता-उम्र अपने आंदोलन से बांधे रखती है। मैं इसलिए सब कुछ लिख रहा हू, क्योंकि मुझे बताया गया है कि तुम्हारा तेजस्वी यादव से भी सीधा संपर्क है।

तुम तेजस्वी यादव को इस दिशा मे कुछ कदम उठाने के लिए प्रेरित करोगे। हालांकि मैं जानता हूं कि आज के नेताओं के इर्दगिर्द उन चापलूस, बातूनी तथा खास तौर से अंग्रेजी जबान का रुतबा दिखाकर तथा दिल्ली के भद्र समाज, मीडिया, अखबारनवीशो तथा मुख्तलिफ नेताओं के बीच रिश्ते कायम कर आपकी शान को बनाऊंगा,दिखाकर नजदीकी पा लेते है। जिनका सिद्धांतों, विचारों से दूर-दूर तक का रिश्ता नहीं है। नेताओं की नजदीकी से एमएलए एमपी राज्यसभा के सदस्य भी बन जाते हैं परंतु आंदोलन के लिए ना तो उनके दिल में कोई जज्बा है, और जिस दिन उनकी इच्छा के मुताबिक नहीं होता तो दल बदल में भी वह बहुत माहिर है। नेताओं की नजदीकी कितनी मारक होती है उसके दो उदाहरण मेरे सामने हैं। मुलायम सिंह जैसे जमीनी लड़ाकू सोशलिस्ट का अमर सिंह जैसे सियासी सौदागर के कारण, कितना बड़ा नुकसान हुआ इससे सभी वाकिफ है। इसी तरह लालू प्रसाद यादव जैसे योद्धा, ने भाजपा के राज में हर तरह के हमलो दुश्वारियां को झेलते हुए भी कभी समर्पण नहीं किया, परंतु उनके यहां भी ऐसे कारोबारी,शुद्ध व्यापारी के कारण कई तरह की मुसीबतो को इनको झेलना पड़ रहा है। और आज भी मैं देख रहा हूं कि ऐसे ही कुछ चतुर, सुजान, लफ़्फ़ाज़ आज उनके प्रतिनिधि बने हुए हैं। किसी कूपात्र को विधायक, लोकसभा, राज्यसभा का सदस्य बनाने पर सिर्फ बदनामी को झेलना होता है परंतु जिस दिन लालू प्रसाद ने राजनीति प्रसाद जैसे सोशलिस्ट को जिसने अपनी तमाम उम्र सोशलिस्ट तहरीक में गुजारी है, मधु लिमये के बिहार आने पर स्टेशन से लेकर वापस जाने तक छाया की तरह बिना किसी चाहत और मिलने की आशा के बावजूद अपने को जोड़े रखा। यही नहीं मधुलिमए के इंतकाल के 27 वर्ष के बावजूद हर साल पटना में उनकी स्मृति में भव्य आयोजन यह करते हैं। उनको जिस दिन साथी लालू प्रसाद ने राज्यसभा का सदस्य बनाया, बिहार तथा अन्य सूबो के कई सोशलिस्ट कार्यकर्ताओं तथा दिल्ली की संसद में पुराने सोशलिस्‍ट सदस्यों ने लालू प्रसाद की तारीफ की। जस्टिस राजेंद्र सच्चर, बद्री विशाल पित्ती, सच्चिदानंद सिन्हा ,जैसे सोशलिस्टो का जिनसे समाजवादी आंदोलन गौरवान्वित है, प्रोफेसर आनंद कुमार, लाखों कामगारों मजदूरो के संगठन ‘हिंद मजदूर सभा’ के नेता हरभजन सिंह सिद्धू जैसे सोशलिस्ट जिन्होंने तमाम उम सोशलिस्ट तहरीक का परचम लहराने में लगा दी, अगर उनको संसद में भेजा जाता तो जहां एक तरफ इन सोशलिस्टों द्वारा आंदोलन के लिए गए त्याग, समर्पण, दिशा निर्देशन का सम्मान होता, वही दिल्ली की संसद उनके ज्ञान की रोशनी से वाकिफ होती।अगर कार्यकर्ताओं को आप सम्मान देंगे तो इससे न केवल आपका मान बढ़ेगा ताउम्र आप सत्ता में हो या नहीं, उसके बावजूद वह आपके साथ जुड़े रहेंगे। बिहार के हमारे वरिष्ठ सोशलिस्ट साथी शिवानंद तिवारी इसकी मिसाल है जब लालू प्रसाद पर चौतरफा हमला हो रहा है, उस समय वे चट्टान की तरह साथी लालू प्रसाद के साथ खड़े हैं। विचार ही ऐसी शक्ति है जो साथियों को जोड़े रखती है। मेरी इल्तजा है कि आप तेजस्वी को सोशलिस्ट विचार दर्शन, सिद्धांतों नीतियों कार्यक्रमों मैं दीक्षित करने तधा समाजवादी साहित्य, शिक्षण प्रशिक्षण, शिविरो का आयोजन मुसलसल करने को कहें, जिससे नई पीढ़ी के नौजवान वैचारिक रूप से सोशलिस्ट विचारधारा से प्रतिबद्ध हो कर तमाम उम्र आंदोलन से जुड़े रहे। मुझे खुशी है कि साथी जयंत जिज्ञासु बड़ी शिद्दत के साथ इस कार्य में जुटे हुए है। एक वीडियो में जब तेजस्वी यादव से पूछा गया कि आपने हाल ही में कौन सी सबसे अच्छी पुस्तक पढ़ी है, तो उन्होंने माना की जेएनयू के छात्र जयंत जिज्ञासु ने मुझे डॉक्टर राममनोहर लोहिया की जो किताब दी है, उसको मैंने पढ़ा है।
.. .. राजकुमार जैन

  • Related Posts

    नेपाल की स्थिरता के साथ परिवर्तन की खोज
    • TN15TN15
    • March 12, 2026

    नेपाल में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों…

    Continue reading
    क्या मोदी लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील कर सकते हैं?
    • TN15TN15
    • March 10, 2026

    1965 में जब भारत पाकिस्तान के साथ युद्ध…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    प्राधिकरण द्वारा लगातार हरियाली का दायरा घटाने पर किसान सभा ने दर्ज कराया विरोध

    • By TN15
    • March 16, 2026
    प्राधिकरण द्वारा लगातार हरियाली का दायरा घटाने पर किसान सभा ने दर्ज कराया विरोध

    केरल चुनाव के लिए BJP ने जारी की पहली लिस्ट, राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन को इस सीट से उतारा

    • By TN15
    • March 16, 2026
    केरल चुनाव के लिए BJP ने जारी की पहली लिस्ट, राजीव चंद्रशेखर और वी मुरलीधरन को इस सीट से उतारा

    एक घंटे में कितना तेल पीता है ‘शिवालिक जहाज’, जो LPG लेकर आज पहुंचेगा भारत?

    • By TN15
    • March 16, 2026
    एक घंटे में कितना तेल पीता है ‘शिवालिक जहाज’, जो LPG लेकर आज पहुंचेगा भारत?

    भारतीय किसान यूनियन भानु ने घरेलू गैस सिलेंडर की समस्या को लेकर नोएडा सिटी मजिस्ट्रेट को दिया ज्ञापन 

    • By TN15
    • March 16, 2026
    भारतीय किसान यूनियन भानु ने घरेलू गैस सिलेंडर की समस्या को लेकर नोएडा सिटी मजिस्ट्रेट को दिया ज्ञापन 

    कच्चा तेल पर्याप्त मात्रा में, कई राज्यों में कमर्शियल LPG की सप्लाई शुरू

    • By TN15
    • March 16, 2026
    कच्चा तेल पर्याप्त मात्रा में, कई राज्यों में कमर्शियल LPG की सप्लाई शुरू

    सोनम वांगचुक जोधपुर की जेल से रिहा, सुप्रीम कोर्ट में बुरी तरह से घिरी हुई है केंद्र सरकार

    • By TN15
    • March 16, 2026
    सोनम वांगचुक जोधपुर की जेल से रिहा, सुप्रीम कोर्ट में बुरी तरह से घिरी हुई है केंद्र सरकार