कई साल पहले भेजे थे एजेंट… कैसे मोसाद, CIA बना रहे थे खामेनेई को मारने का प्लान?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या 28 फरवरी 2026 को तेहरान में एक लीडरशिप मीटिंग के दौरान इजरायली हमले में हुई। यह मोसाद (इजरायली खुफिया एजेंसी) और CIA (अमेरिकी) की दशकों लंबी खुफिया कार्रवाई का नतीजा था। “कई साल पहले भेजे गए एजेंट” ठीक उसी रणनीति को इंगित करता है जिसकी रिपोर्ट्स में बात हो रही है।

कैसे बना था प्लान? (स्टेप-बाय-स्टेप)

  1. दशकों का तैयारी और नेटवर्क (Mossad का रोल): मोसाद ने ईरान पर कई दशकों से फोकस रखा था। उन्होंने ईरान के अंदर इंफॉर्मेंट्स, लोकल एजेंट्स और लॉजिस्टिक्स का गहरा नेटवर्क बनाया। लगभग 20 साल पहले मोसाद ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदली – अब वे ईरान के अंदर ही लोकल ईरानी एजेंट्स (रेजीम के खिलाफ वाले नागरिक) रिक्रूट करने लगे। इन एजेंट्स को एडवांस्ड ट्रेनिंग और इक्विपमेंट दी गई। इससे वे ईरान की अंदरूनी जानकारी आसानी से हासिल कर पाते थे। उदाहरण: खामेनेई की डेली रूटीन, उनके परिवार, सहयोगी, सुरक्षा डिटेल्स और यहां तक कि खाना-पीना/कचरा डिस्पोजल जैसी छोटी-छोटी बातों का “जिगसॉ पजल” जैसा पूरा फाइल तैयार कर लिया गया था।
  2. हाल के महीनों में ट्रैकिंग (CIA का रोल): CIA ने कई महीनों से खामेनेई की लोकेशन, पैटर्न और मूवमेंट्स को ट्रैक किया। वे फोन, कम्युनिकेशन और टेक्निकल सर्विलांस के जरिए डेटा इकट्ठा करते रहे। ईरानी अधिकारी अक्सर फोन इस्तेमाल करते थे, जिससे ट्रेल छूट जाता था।
  3. मौका मिला – मीटिंग की खुफिया जानकारी: CIA को पता चला कि 28 फरवरी 2026 को तेहरान के सेंट्रल लीडरशिप कंपाउंड (सुप्रीम लीडर के ऑफिस, प्रेसिडेंसी और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल वाला इलाका) में टॉप ईरानी लीडर्स की सीक्रेट मीटिंग हो रही है। खामेनेई खुद वहां होंगे। यह “हाई-फिडेलिटी” इंटेलिजेंस था। मोसाद के ग्राउंड एजेंट्स ने भी कन्फर्म किया। इसी वजह से हमले का टाइमिंग अडजस्ट किया गया (पहले प्लान अलग था)।
  4. अंतिम हमला कैसे हुआ: इजरायली जेट्स ने लंबी दूरी के मिसाइलों और बमों से 60 सेकंड के अंदर एक साथ कई टारगेट्स को हिट किया। खामेनेई समेत 7 टॉप सिक्योरिटी लीडर्स, उनके परिवार के सदस्य और 40+ सीनियर अधिकारी मारे गए। यह “डेटा, एक्सेस, ट्रस्ट और टाइमिंग” का परफेक्ट कॉम्बिनेशन था।

क्यों कामयाब हुआ?

  • मोसाद के पुराने एजेंट नेटवर्क + CIA की टेक्नोलॉजी का मिक्स।
  • ईरान की सिक्योरिटी में कमजोरी (बॉडीगार्ड्स के फोन हैक या इनसाइडर लीक की रिपोर्ट्स भी हैं)।
  • पिछले जून के 12-दिन के युद्ध में भी इसी तरीके से न्यूक्लियर वैज्ञानिकों और कमांडर्स को टारगेट किया गया था।
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