एनडीए के कई नेताओं का फिर से राज्यसभा में पहुंचना बड़ी चुनौती!

मोदी सरकार के आधा दर्जन (लगभग 6) केंद्रीय मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है। अगर ये मंत्री राज्यसभा में दोबारा निर्वाचित नहीं होते, तो संविधान के अनुसार (अनुच्छेद 75), उन्हें संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना जरूरी है। ऐसे में उनका मंत्री पद खतरे में पड़ सकता है, और कैबिनेट में बदलाव हो सकता है। इसे ही “अग्निपरीक्षा” कहा जा रहा है।
प्रभावित मुख्य मंत्री (रिपोर्ट्स के आधार पर):

हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री) – उत्तर प्रदेश से।
बीएल वर्मा (सामाजिक न्याय राज्य मंत्री) – उत्तर प्रदेश से।
रवनीत सिंह बिट्टू (रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री) – राजस्थान से (कांग्रेस से भाजपा में आए, 2024 लोकसभा हारे लेकिन मंत्री बने)।
रामदास अठावले (सामाजिक न्याय राज्य मंत्री, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया) – महाराष्ट्र से (भाजपा गठबंधन)।
जॉर्ज कुरियन (मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री) – मध्य प्रदेश या केरल से संबंधित।
रामनाथ ठाकुर (कृषि राज्य मंत्री, जेडीयू) – बिहार से।

ये ज्यादातर भाजपा या एनडीए गठबंधन से हैं। 2026 में राज्यसभा की कुल 75 सीटों पर चुनाव होंगे (अप्रैल, जून और नवंबर में), जिसमें उत्तर प्रदेश से 10, बिहार से 5, महाराष्ट्र से 7 सीटें खाली होंगी।
क्यों है चुनौती?

राज्यसभा चुनाव विधानसभाओं के विधायकों के वोट से होते हैं। एनडीए की कई राज्यों में मजबूत स्थिति है (जैसे यूपी, बिहार), इसलिए ज्यादातर मंत्रियों की वापसी संभव है।
लेकिन गठबंधन की राजनीति, सीट बंटवारा और नए चेहरों को मौका देने की रणनीति से कुछ को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
अगर कोई मंत्री दोबारा नहीं चुना जाता और लोकसभा का सदस्य भी नहीं है, तो 6 महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन उसके बाद पद छोड़ना पड़ सकता है।

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