इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से बड़ी त्रासदी हुई है। पाइपलाइन लीकेज के कारण सीवेज का पानी नर्मदा जल सप्लाई में मिल गया, जिससे उल्टी-दस्त की महामारी फैली।
मौतों और प्रभावितों की स्थिति
परिजनों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार अब तक 10-13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में 4-7 मौतों की पुष्टि हुई है। 162 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावितों से मुलाकात की और जांच समिति गठित की है। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है (दो सस्पेंड, एक बर्खास्त)। मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये मुआवजा और मुफ्त इलाज का ऐलान किया गया है।
मंत्री की बदसलूकी की घटना
मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (जो इंदौर-1 से विधायक भी हैं और भागीरथपुरा उनका क्षेत्र है) पर यह आरोप लगा है।
31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री की बैठक के बाद बाहर निकलते समय एक रिपोर्टर (NDTV सहित मीडिया) ने दूषित पानी से मौतों और पीड़ितों के इलाज खर्च की रिफंड न मिलने पर सवाल किया।
मंत्री ने गुस्से में कहा — “अरे छोड़ो यार, फोकट के सवाल मत पूछो” और कथित तौर पर अपशब्द (जैसे “घंटा”) का इस्तेमाल किया।
रिपोर्टर ने जवाब दिया कि यह फोकट सवाल नहीं, ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग के बाद पूछा जा रहा है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मंत्री विजयवर्गीय ने X (ट्विटर) पर पोस्ट कर खेद जताया और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में उनके शब्द गलत निकल गए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने मंत्री से इस्तीफे की मांग की है और इसे सरकार की नाकामी बताया है।
इंदौर को लगातार सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा मिलता रहा है, लेकिन यह घटना नगर निगम और जल सप्लाई सिस्टम की लापरवाही उजागर करती है। जांच जारी है और हाईकोर्ट ने भी स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
स्थिति नियंत्रण में आ रही है, टैंकरों से पानी सप्लाई हो रही है और लोगों को उबालकर पानी पीने की सलाह दी गई है।








