आखिर ग्रीनलैंड को हर कीमत पर क्यों पाना चाहते हैं ट्रंप ?

ट्रंप ने हाल ही में 9 जनवरी एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अपना दावा दोहराया है। उन्होंने व्हाइट हाउस में तेल कंपनी के अधिकारियों से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर “कुछ करेगा, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो” (We are going to do something on Greenland whether they like it or not)। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर आसान तरीके से (खरीद या डील) नहीं हुआ, तो “हार्ड वे” (कठिन या बलपूर्वक तरीके) से किया जाएगा। उनका मुख्य तर्क है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड नहीं लिया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे, और अमेरिका को ऐसे पड़ोसी नहीं चाहिए।
ट्रंप ग्रीनलैंड को हर कीमत पर क्यों चाहते हैं? ट्रंप ने बार-बार “नेशनल सिक्योरिटी” का हवाला दिया है, लेकिन इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

 

रणनीतिक लोकेशन (Arctic Control)

 

ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जहां से उत्तरी ध्रुव के रास्ते जहाज चल सकते हैं। जलवायु परिवर्तन से बर्फ पिघल रही है, जिससे नए शिपिंग रूट्स खुल रहे हैं। अमेरिका नहीं चाहता कि रूस या चीन इस क्षेत्र पर हावी हों।
खनिज संसाधन (Rare Earth Minerals)
ग्रीनलैंड में दुनिया के सबसे बड़े रेयर अर्थ एलिमेंट्स (जैसे नियोडिमियम, लिथियम, ग्रेफाइट, यूरेनियम आदि) के भंडार हैं। ये मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, विंड टर्बाइन, फोन, कंप्यूटर चिप्स और हाई-टेक हथियार बनाने के लिए जरूरी हैं।
चीन इन मिनरल्स पर 70-90% ग्लोबल सप्लाई कंट्रोल करता है, और ट्रंप इसे अमेरिका के लिए “सप्लाई चेन सिक्योरिटी” का बड़ा मुद्दा मानते हैं।यहां कुछ प्रमुख संसाधनों की झलक:
रेयर अर्थ एलिमेंट्स: दुनिया के सबसे बड़े अनएक्सप्लोर्ड डिपॉजिट्स में से एक।
अन्य मिनरल्स: आयरन ओर, जिंक, गोल्ड, तांबा, यूरेनियम, ऑयल और गैस।
जलवायु परिवर्तन से बर्फ पिघलने से ये संसाधन ज्यादा आसानी से निकाले जा सकते हैं।
ये संसाधन अमेरिका को चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।

सैन्य महत्व

अमेरिका के पास पहले से ही थुल (Thule) एयर बेस है (1951 के समझौते के तहत), लेकिन ट्रंप कहते हैं कि “लीज” (किराया) से रक्षा नहीं होती, “ओनरशिप” (मालिकाना हक) चाहिए।

डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों बार-बार कह चुके हैं कि “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है”। यूरोपीय देशों ने भी इसका समर्थन किया है। ट्रंप के बयानों से NATO में तनाव बढ़ रहा है, क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और NATO सदस्य है।
ट्रंप का यह बयान काफी आक्रामक है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद पैदा कर रहा है। क्या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है या असल में कोई बड़ा कदम उठेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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