लद्दाख को साम्प्रदायिक आधार पर बांटना बंद करे केन्द्र सरकार
TN15
लद्दाख में निम्नलिखित मांगों को लेकर विगत चार वर्षों से लेह एपेक्स बाॅडी व कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस संयुक्त रूप से संघर्ष कर रहे हैं।
1.लद्दाख को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।
2.लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
3.लद्दाख का अपना लोक सेवा आयोग गठित किया जाए।
4.लेह व कारगिल दो पृथक संसदीय क्षेत्र बनाए जाएं।
इन मांगों को लेकर सोनम वांगचुक के पांचवें अनशन के दौरान 24 सितम्बर, 2025 को हिंसा हुई और पुलिस के गोली कांड में 4 लद्दाखी शहीद हो गए। सोनम वांगचुक अभी भी जोधपुर जेल में हैं और करीब 15 लद्दाखी लेह की जेल में बंद हैं।
सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) मांग करती है कि सोनम वांगचुक सहित सभी बंदियों को तत्काल रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद का पांच वर्ष का कार्यकाल 31 अक्टूबर को खत्म हो गया किंतु इसके अगले चुनाव की कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है। लद्दाख में विधान सभा का तो कोई प्रावधान है नहीं, जो बचा खुचा लोकतंत्र स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के नाम पर था वह भी वर्तमान में स्थगित है।
भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार लेह एपेक्स बाॅडी व कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के साथ वार्ता जरूर कर रही है लेकिन वह उपर्युक्त मांगों को मानने को तैयार नहीं है जो आज एक-एक लद्दाखी की मांग है। उल्टे सरकार बौद्ध बहुसंख्यक लेह व मुस्लिम बहुसंख्यक कारगिल के बीच फूट डालने की कोशिश कर रही है। सरकार की बौद्ध-मुस्लिम एकता को तोड़ने की कोई भी कोशिश नाकाम होगी।
साथ ही हम जम्मू-कश्मीर की पूर्ण राज्य की मांग का भी समर्थन करते हैं। हाल ही में दिल्ली में हुई बम विस्फोट की घटना से स्पष्ट है कि केन्द्र सरकार भले ही दावा करे कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य हो गई है लेकिन सच यह है कि जम्मू-कश्मीर के लोग सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से असंतुष्ट हैं। पहले हमें बताया गया था कि नोटबंदी से आतंकवाद खत्म होगा, फिर बताया गया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने से आतंकवाद खत्म होगा लेकिन साफ है कि यह दावे झूठे थे। जब तक जम्मू-कश्मीर को शेष राज्यों के बराबर दर्जा नहीं दिया जाएगा, वहां के लोगों को यह महसूस नहीं होगा कि वे भी भारत का उसी तरह हिस्सा हैं जैसे शेष भारत के लोग तब तक आतंकवाद की समस्या खत्म होना मुश्किल है। हमे जम्मू-कश्मीर के साथ सौतेला व्यवहार करना बंद करना होगा।