हां, लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहे विवाद के कारण आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और KGMU प्रशासन (खासकर कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद) के बीच की तनातनी से जुड़ा है।
विवाद की शुरुआत और पृष्ठभूमि
सबसे पहले दिसंबर 2025 में KGMU के एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर (रमीजुद्दीन) पर लव जिहाद, यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के आरोप लगे। महिला आयोग की शिकायत पर कार्रवाई हुई और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। अपर्णा यादव ने 9 जनवरी 2026 को KGMU जाकर कुलपति से मिलने की कोशिश की, लेकिन VC चैंबर बंद मिलने पर उनके समर्थकों ने हंगामा किया। आरोप हैं कि:
दरवाजे तोड़े गए
कंप्यूटर गिराया गया
अभद्र नारेबाजी की गई
महिलाओं के साथ बदसलूकी हुई
KGMU प्रशासन ने इसी दिन चौक थाने में तहरीर दी, लेकिन 72 घंटे बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई।
OPD बंद की चेतावनी
KGMU के डॉक्टर्स, रेजीडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ, शिक्षक और कर्मचारियों की संयुक्त समिति ने 12 जनवरी 2026 को बैठक की और अल्टीमेटम दिया:
अगर अगले 24 घंटे में अपर्णा यादव के समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई, तो 13 जनवरी 2026 (कल) से इमर्जेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी OPD सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।
KGMU रोजाना 8,000-10,000 मरीजों को OPD में देखता है। अगर OPD बंद हुआ तो गरीब-आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल संस्थान है।
दोनों पक्षों के दावे
अपर्णा यादव का पक्ष: प्रशासन महिलाओं की शिकायतों को दबा रहा है, आरोपी को बचाने की कोशिश हो रही है, और विशाखा कमेटी निष्पक्ष नहीं है। उन्होंने CM योगी से मुलाकात की और रिपोर्ट सौंपी।
KGMU प्रशासन का पक्ष: अपर्णा यादव बिना सूचना के आईं, उनके साथ आई भीड़ ने गुंडागर्दी की, और यह संस्थान की छवि खराब कर रही है। VC ने कहा कि ऐसा माहौल में काम मुश्किल है।
आम लोगों पर असर
यह लड़ाई राजनीतिक और प्रशासनिक है, लेकिन पिस रहे हैं मरीज और उनके परिवार। KGMU जैसे बड़े अस्पताल में OPD बंद होने से रोजमर्रा के इलाज (जैसे पुरानी बीमारियां, चेकअप) प्रभावित होंगे। इमरजेंसी तो चलेगी, लेकिन सामान्य मरीजों को परेशानी होगी। स्थिति अभी तनावपूर्ण है। पुलिस और सरकार क्या फैसला लेती है, यह देखना बाकी है। अगर FIR हो गई तो शायद टकराव टल जाए, वरना कल से बड़ा संकट आ सकता है।

