नागपुर महानगरपालिका (नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) चुनावों में राजनीतिक उलझनें चरम पर हैं। यह हेडलाइन आज तक की एक रिपोर्ट से ली गई है, जो 15 जनवरी को होने वाले चुनावों की स्थिति बयां करती है।
मुख्य स्थिति
बीजेपी का गढ़ है नागपुर: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी का पावर सेंटर। बीजेपी यहां मजबूत स्थिति में है और अकेले 143 सीटों पर लड़ रही है।
शिंदे गुट की बगावत: महायुति गठबंधन में बीजेपी-शिंदे शिवसेना साथ हैं, लेकिन शिंदे गुट को सिर्फ 8 सीटें मिलीं (जिनमें से कई उम्मीदवार मूल रूप से बीजेपी के ही हैं)। नाराज शिंदे गुट के कार्यकर्ता (“सिपाही”) बड़ी संख्या में निर्दलीय या अन्य तरीके से मैदान में उतर रहे हैं, जो बीजेपी के वोट काट सकते हैं और गणित बिगाड़ सकते हैं।
कांग्रेस की मुश्किलें: कांग्रेस अकेले सभी 151 सीटों पर लड़ रही है। महाविकास अघाड़ी (MVA) यहां बिखर गई है – शरद पवार की NCP (SP) ने 76 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। दोनों की विचारधारा करीब होने से वोट बंटवारे की आशंका है। अजित पवार गुट की NCP ने भी 96 सीटों पर दमदार उम्मीदवार (पूर्व नगरसेवक सहित) उतारे हैं, जो कांग्रेस के लिए अतिरिक्त चुनौती हैं। पवार फैमिली का “पावर” (अजित और शरद दोनों गुट) कांग्रेस को परेशान कर रहा है।
अन्य पार्टियां: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) 58 सीटों पर लड़ रही है।
शिंदे गुट की बगावत: महायुति गठबंधन में बीजेपी-शिंदे शिवसेना साथ हैं, लेकिन शिंदे गुट को सिर्फ 8 सीटें मिलीं (जिनमें से कई उम्मीदवार मूल रूप से बीजेपी के ही हैं)। नाराज शिंदे गुट के कार्यकर्ता (“सिपाही”) बड़ी संख्या में निर्दलीय या अन्य तरीके से मैदान में उतर रहे हैं, जो बीजेपी के वोट काट सकते हैं और गणित बिगाड़ सकते हैं।
कांग्रेस की मुश्किलें: कांग्रेस अकेले सभी 151 सीटों पर लड़ रही है। महाविकास अघाड़ी (MVA) यहां बिखर गई है – शरद पवार की NCP (SP) ने 76 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। दोनों की विचारधारा करीब होने से वोट बंटवारे की आशंका है। अजित पवार गुट की NCP ने भी 96 सीटों पर दमदार उम्मीदवार (पूर्व नगरसेवक सहित) उतारे हैं, जो कांग्रेस के लिए अतिरिक्त चुनौती हैं। पवार फैमिली का “पावर” (अजित और शरद दोनों गुट) कांग्रेस को परेशान कर रहा है।
अन्य पार्टियां: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) 58 सीटों पर लड़ रही है।
यह चुनाव बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है, लेकिन गठबंधन में आंतरिक कलह और विपक्ष की बिखराव के बावजूद वोट कटिंग से रोचक मुकाबला होने की उम्मीद है। नामांकन के अंतिम दिनों में बगावत, इस्तीफे और ड्रामा भी खूब देखने को मिला। परिणाम 16 जनवरी को आएंगे।

