हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला वन मंडल के जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। रविवार को धर्मशाला शहर के नजदीक सराह और बनडी क्षेत्र में जंगलों में आग लगने के दो मामले सामने आए। वन विभाग की टीम ने करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। धर्मशाला के संभागीय वन अधिकारी (DFO) अमित शर्मा ने बताया कि दोनों आगजनी की घटनाएं रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे रिपोर्ट हुई थीं। सूचना मिलते ही वन विभाग के कर्मचारियों को मौके पर भेज दिया गया और रात करीब साढ़े नौ बजे तक आग को पूरी तरह बुझा दिया गया।
कैसे जंगल तक पहुंचती है आग?
DFO अमित शर्मा ने कहा कि अधिकांश मामलों में लोग अपनी घासनियों की सफाई के लिए आग लगाते हैं, जो बाद में फैलकर जंगलों तक पहुंच जाती है और बड़े नुकसान का कारण बनती है. इन कारणों से ही जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ती हैं। इस तरह की घटनाओं से जंगल के पेड़-पौधों को बड़ नुकसान पहुंचता है।
वन मंडल धर्मशाला को 92 लाख रुपये का नुकसान
DFO के अनुसार, वन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अब तक जंगलों में आग लगने के 78 मामले दर्ज किए गए हैं. रविवार को सराह और बनडी में लगी आग के मामलों को पोर्टल पर अपडेट करने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 80 हो जाएगी. इन घटनाओं से अब तक करीब 347 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुए हैं तथा प्रथम आकलन (फर्स्ट टियर रिपोर्ट) के अनुसार, वन मंडल धर्मशाला को करीब 92 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। ,
अमित शर्मा ने बताया कि आग से हुए नुकसान का अंतिम आकलन बरसात के बाद सेकेंड टियर मॉनिटरिंग के दौरान किया जाता है. इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पौधरोपण किया जाता है और कई पौधे प्राकृतिक रूप से फिर से जीवित हो जाते हैं, जिससे वास्तविक नुकसान के आंकड़ों में कमी आ सकती है।
गलों में आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण
उन्होंने कहा कि जंगलों में आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है. पहाड़ी क्षेत्रों का दुर्गम भूभाग, 60 से 70 प्रतिशत तक की ढलान, तेज हवाएं और पानी की कमी आग बुझाने के अभियान को और कठिन बना देती है. कई बार कर्मचारियों को पीने का पानी भी अपने साथ लेकर जाना पड़ता है। ऐसे में फायर लाइन बनाकर आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया जाता है।
DFO ने कहा कि वन विभाग के लिए सबसे महत्वपूर्ण आग बुझाने में जुटे कर्मचारियों और ग्रामीणों की सुरक्षा है. इसके बावजूद विभाग की पूरी कोशिश रहती है कि जंगलों में लगी आग पर जल्द से जल्द काबू पाया जाए और वन संपदा को अधिक नुकसान से बचाया जा सके.

