कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का कड़ा विरोध किया, जिसमें उन्होंने संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों की समीक्षा की बात कही थी। खरगे ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में चेतावनी दी कि यदि संविधान के किसी भी शब्द को बदला गया, तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी और अंतिम दम तक लड़ेगी। उन्होंने होसबाले को ‘मनुस्मृति का आदमी’ करार देते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस गरीबों, दलितों और कमजोर वर्गों के खिलाफ है, जो पुरानी जातिगत असमानताओं को बनाए रखना चाहता है। खरगे ने कहा कि यह न केवल होसबाले की राय है, बल्कि आरएसएस की पूरी विचारधारा संविधान के मूल सिद्धांतों—समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के खिलाफ है।
उन्होंने आरएसएस से अपील की कि वह बयानबाजी के बजाय सामाजिक समानता और छुआछूत जैसी कुरीतियों को खत्म करने पर ध्यान दे। खरगे ने स्पष्ट किया कि संविधान देश की आत्मा है और कांग्रेस इसे किसी भी हाल में बदलने नहीं देगी। यह बयान उस समय आया है, जब होसबाले ने एक कार्यक्रम में कहा था कि ये शब्द आपातकाल (1975-77) के दौरान जोड़े गए थे और इन पर पुनर्विचार की जरूरत है, क्योंकि ये मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे। इस मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर संविधान को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।








