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तुम्हारा काल्पनिक समाजवाद !

मूसा वाला के दौर में तुम
गांधीवाद का जुमला सुनाते हो ..
मार्क्सवाद और अम्बेडकरवाद
की गाथा गुन गुनाते हो ..
तुम मुल्ला मुल्ला चिल्ला कर
बच्चों के जेहन में जहर भरते हो..
तुम बूढ़ी हड्डियों के सहारे
युवाओं को सब्जबाग दिखाते हो..
बीते दुखड़े सुना सुना कर
तुम नाहक पकाते हो ..
जेन ज़ी के दौर में
तुम कछुए की चाल चलते हो ..
रंग बिरंगी दुनिया में
सादगी का ख्वाब दिखाते हो ..
आधुनिकता के दौर में
तुम काल्पनिक समाजवाद दिखाते हो ..
काल्पनिक समाजवाद …

के एम भाई

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