विशेष रूप से वेलेंटाइन डे पर पहले दिन की महफिल ‘इज़हार-ए-इश्क’ थीम पर सजी, जहां नौजवान शायरों ने मोहब्बत की नर्म-नोकझोंक और टूटे दिलों की शायरी से समां बांध दिया।
एक चर्चित शेर जो खूब सुना गया और खबरों में छाया रहा:
“नौकरी ढूंढ़ता रह जाएगा तू शहरों में…”
(यह बेरोजगारी और इश्क के मिश्रण वाली व्यंग्यात्मक या भावुक शायरी का हिस्सा लगता है, जो युवाओं के संघर्ष और प्यार की जद्दोजहद को बयां करता है।)
नौजवान शायरों जैसे पीयूष अग्निहोत्री ने वेलेंटाइन डे पर मोहब्बत और दिल टूटने की नर्म शायरी सुनाई, जबकि चेतना बलहारा ने इकरार-ए-इश्क और लाज भरी भावनाओं को आवाज दी। महफिल में रोमांटिक ग़ज़लें, इश्क के इजहार और दिल छू लेने वाली पंक्तियां गूंजीं।
आजतक की इस पहल से लखनऊ की तहजीब और अवधी संस्कृति फिर जीवंत हो उठी है। कार्यक्रम में भजन जैमिंग से शुरुआत हुई, जैसे “रामा रामा रटते-रटते बीती रे उमरिया…” और “श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन…” से माहौल भक्तिमय रहा।
“नौकरी ढूंढ़ता रह जाएगा तू शहरों में…”

लखनऊ। लखनऊ में साहित्य आजतक का भव्य आयोजन चल रहा है। यह दो दिवसीय साहित्यिक महोत्सव (14-15 फरवरी) अंबेडकर मेमोरियल पार्क, गोमती नगर में हो रहा है, जहां कविता, ग़ज़ल, भजन, संगीत और विचार-विमर्श का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
