ग्रेटर नोएडा । किसान संघर्ष मोर्चा, गौतम बुद्ध नगर के आह्वान पर आज 17 अगस्त को प्रस्तावित “ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण चलो” महापंचायत एवं प्रदर्शन को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन व पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी।
लोकतंत्र को कुचलने की मंशा से गांव-गांव, घर-घर पुलिस तैनात कर दी गई। प्राधिकरण को छावनी में तब्दील कर चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई।
सीटू जिला महासचिव रामस्वारथ और सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा को दो दिन से हाउस अरेस्ट कर बंधक बना कर रखा गया है। इसी तरह किसान सभा, किसान परिषद, किसान एकता संघ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को घरों में नजरबंद किया गया। प्रशासन के तमाम दमन के बावजूद आंदोलन नहीं रुका।
पुलिस की घेराबंदी को तोड़ते हुए बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान, मजदूर, महिलाएं, एडवोकेट और आम नागरिकों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर गिरफ्तारियां दीं।
किसान सभा के जैतपुर कार्यालय पर किसान सभा जिला अध्यक्ष डॉ. रूपेश वर्मा के साथ कई सौ किसानों व महिलाओं को गिरफ्तार किया गया।
सीटू जिला अध्यक्ष मुकेश कुमार राघव और उपाध्यक्ष रामसागर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मजदूर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहुंचे, जहां से पुलिस ने जबरन खदेड़ कर भगा दिया।
अभी तक की सूचना के अनुसार किसान सभा जिला अध्यक्ष रूपेश वर्मा सहित 150 से अधिक किसानों को जेल भेज दिया गया है जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, तथा 500 से अधिक लोगों को अलग-अलग थानों में बंदी बनाकर रखा गया है जिसकी प्रशासन द्वारा कोई सूचना नहीं दी जा रही है।
नेताओं ने कहा –
मुकेश कुमार राघव, जिला अध्यक्ष सीटू ने कहा – “यह शासन-प्रशासन की सरेआम तानाशाही है। संवैधानिक, लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला गया है। बोलने की आजादी पर हमला है। इसका हर हाल में विरोध किया जाएगा।”
कामरेड पुष्पेंद्र त्यागी, केंद्रीय कमेटी सदस्य, अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा – “किसानों के आंदोलन से उत्तर प्रदेश सरकार और गौतम बुद्ध नगर प्रशासन डर गया, हिल गया। पूरी सरकार-प्रशासन सड़क पर आ गया। यह हमारे आंदोलन की जीत है। किसानों ने साबित कर दिया कि दमन से आंदोलन नहीं दबेगा। अपने हक, अधिकार और मान-सम्मान के लिए आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।”
डॉ. रूपेश वर्मा, जिला अध्यक्ष किसान सभा ने अपील की है कि गौतम बुद्ध नगर के सभी जागरूक किसान, नागरिक, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अधिक से अधिक इस आंदोलन का हिस्सा बनें, पुलिस दमन का विरोध करें और किसानों के हकों की लड़ाई में शामिल हों।
मुख्य मांगें –
1. 10% आबादी प्लाट लेकर रहेंगे 2. नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू करो 3. आबादियों का निस्तारण करो 4. वादाखिलाफी के विरुद्ध न्याय दो
प्रशासन द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न से पूरे जनपद में भारी आक्रोश है जो कभी भी बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

