वाह री मोदी एक ओर ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर महिलाओं की सहानुभूति बटोरने का प्रयास चल रहा तो दूसरी ओर तालिबानी मंत्री के लिए अपनी महिला पत्रकारों को ही अपमानित कर दिया गया। ऐसी क्या मज़बूरी थी कि अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को जाने से रोक दिया गया ? ठीक है कि अफगानिस्तान में तालिबान के महिलाओं पर शिक्षा, नौकरी और सार्वजनिक भागीदारी पर रोक जैसे कथित प्रतिबंध हैं पर भारत में तालिबानी मंत्री के लिए ऐसा क्यों किया गया ? ऐसी सरकार की क्या मज़बूरी थी कि भारत में सम्मान का प्रतीक मानी जाने वाली महिला पत्रकारों को अपमानित कर दिया गया ? बीजेपी तो महिला सम्मान का सबसे बड़ा ढोल बजाती घूमती है।
देखने की बात यह है कि बीजेपी और उसके समर्थक दुनिया में प्रधानमंत्री का डंका पीटने का दम्भ भरते हैं पर विदेश नीति पर भी देश को अपमानित होना पड़ा है। गत दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वहां रह रहे भारतीयों को हथकड़ियों और बेड़ियों में सैन्य विमान से भारत भेजा। सीजफायर और टैरिफ पर भारत को नीचा दिखाने का प्रयास किया ओर अब अफगानी विदेश मंत्री मुत्तकी के भारत आने पर उनकी प्रेस कांफ्रेंस में महिला पत्रकारों को नहीं जाने दिया गया। अब मुत्तक़ी कह रहे हैं कि महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आने से मना नहीं किया था। तो क्या सरकार ने मना किया था ? सरकार इसका जवाब देना चाहिए।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि देश की मीडिया और प्रेस से संबंधित संगठन चुप क्यों हैं ? सत्ता के लिए महिला सम्मान की बात करने वाले राजनीतिक दल क्या कर रहे हैं ? मानवाधिकार संगठन क्या कर रहे हैं ? महिलाओं के मान सम्मान के लिए लड़ने वाले संगठन क्या कर रहे हैं ?
विदेश मंत्रालय कह रहा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह अफगान दूतावास द्वारा आयोजित थी, जिसमें उनका कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं थी। ऐसे में प्रश्न उठता है कि अफगान दूतावास ने यदि ऐसा किया तो फिर सरकार ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया ? क्या अफगान दूतावास को कुछ भी करने दिया जाएगा ? विदेश मंत्रालय कह रहा है कि दूतावास भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता तो फिर किसके अधिकार क्षेत्र में आता है ? तो फिर अफगान दूतावास कुछ भी कर सकता है ?
विदेश मंत्रालय कह रहा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह अफगान दूतावास द्वारा आयोजित थी, जिसमें उनका कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं थी। ऐसे में प्रश्न उठता है कि अफगान दूतावास ने यदि ऐसा किया तो फिर सरकार ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया ? क्या अफगान दूतावास को कुछ भी करने दिया जाएगा ? विदेश मंत्रालय कह रहा है कि दूतावास भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता तो फिर किसके अधिकार क्षेत्र में आता है ? तो फिर अफगान दूतावास कुछ भी कर सकता है ?
हालांकि इस मामले पर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने पीएम मोदी से सवाल किया कि भारत में हमारे ही देश की कुछ सबसे सक्षम महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया गया ? जबकि महिलाएं ही देश की रीढ़ और गौरव हैं।
राहुल गांधी ने कहा है कि जब आप महिला पत्रकारों को सार्वजनिक मंचों से बाहर रखने की इजाजत देते हैं, तो आप भारत की हर महिला को यह बता रहे होते हैं कि आप बहुत कमजोर हैं। इस तरह के भेदभाव पर आपकी चुप्पी नारी शक्ति पर आपके नारों की खोखलेपन को उजागर करती है। पी चिदंबरम ने पुरुष पत्रकारों को सलाह दी कि उन्हें कॉन्फ्रेंस से बाहर चले जाना चाहिए था।
टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने कहा है कि एक विदेशी मुस्लिम कट्टरपंथी अपनी ‘आस्था’ के नाम पर हमारी जमीन पर हमारी औरतों के साथ हमारे कानूनों और मूल्यों का उल्लंघन कर सकता है। हिम्मत कैसे हुई?
राहुल गांधी ने कहा है कि जब आप महिला पत्रकारों को सार्वजनिक मंचों से बाहर रखने की इजाजत देते हैं, तो आप भारत की हर महिला को यह बता रहे होते हैं कि आप बहुत कमजोर हैं। इस तरह के भेदभाव पर आपकी चुप्पी नारी शक्ति पर आपके नारों की खोखलेपन को उजागर करती है। पी चिदंबरम ने पुरुष पत्रकारों को सलाह दी कि उन्हें कॉन्फ्रेंस से बाहर चले जाना चाहिए था।
टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने कहा है कि एक विदेशी मुस्लिम कट्टरपंथी अपनी ‘आस्था’ के नाम पर हमारी जमीन पर हमारी औरतों के साथ हमारे कानूनों और मूल्यों का उल्लंघन कर सकता है। हिम्मत कैसे हुई?

