भावनाओं से खिलवाड़ को दिल जीतना मान रहे हैं पीएम मोदी?
क्या दो करोड़ युवाओं को हर साल मिल रहा है रोजगार? क्या किसानों की आय हुई दोगुनी ? विदेश से कितना आया काला धन?
मुख्य चुनाव आयुक्त के बचाव में कानून क्यों ? चुनाव आयुक्त के चयन में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश क्यों नहीं शामिल ? अन्याय के खिलाफ उठने वाली आवाज को लाठी के दम पर दबाने का प्रयास क्यों ? तिरंगा लहराने को लेकर इतना बवाल क्यों ? ज्ञानेश कुमार के बचाव में पूरी मशीनरी का इस्तेमाल क्यों ?
चरण सिंह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई भी भाषण देख लीजिए, ऐसा लगता है कि जैसे वह किसी नाटक में कोई रोल अदा कर रहे हों। उनका चरित्र कुछ और है और वह बोलते कुछ और हैं। वह जो नसीहत जनता को देते हैं वह काम खुद ही करने लगते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फरवरी का एक पुराना वीडियो फिर से तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कांग्रेस नेताओं और आंदोलनकारियों पर आक्रामक नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में प्रधानमंत्री यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि यदि किसी को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठना है, तो उसे पहले जनता का दिल जीतना होगा और केवल राजनीतिक फायदे के लिए देश में अस्थिरता या अराजकता फैलाने के प्रयास सफल नहीं होने दिए जाएंगे।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के लिए ऐसा क्या किया है जिससे लोगों का दिल जीता ? यदि वह राम मंदिर निर्माण का श्रेय ले रहे हैं तो बीजेपी अयोध्या में बुरी तरह से हारी है। यदि वह जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का श्रेय ले रहे हैं तो जम्मू कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की सरकार है। यदि वह हिन्दुओं का दिल जीतने की बात कर रहे हैं तो यूजीसी नियमों में बदलाव के बाद सवर्ण समाज ने उन्हें ऐसे ऐसे शब्दों से नवाजा है दिल जीतना तो बहुत दूर की बात है सवर्ण अब मोदी को सम्मान भी देने को तैयार नहीं। दलित पहले से ही नाराज हैं। ओबीसी भी कुछ खास मोदी को पसंद नहीं करते। मुसलमानों का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। तो फिर मोदी ने किसका दिल जीता है ?
दरअसल मोदी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाये गए तंत्रों को कब्जाकर अपनी ब्रांडिंग कराई है।विशेषकर में स्ट्रीम मीडिया को साधकर। मोदी ने जनता लाखों करोड़ रुपए अपनी ब्रांडिंग के लिए मीडिया पर खर्च किये। बीजेपी और उसके समर्थकों में भी मोदी का महिमामंडन कराया गया। यहां तक विदेशी दौरों पर जनता के पैसे के दम पर भारतीय मूल के कार्यक्रम कराकर गोदी मीडिया से मोदी का बखान कराया गया है। तो क्या मोदी का दिल यह है ?
यदि मोदी ने जनता का दिल जीता है तो बताएं कि ऐसा उन्होंने कौन सा काम कर दिया जिससे जनता उनकी दीवानी हो जाए। क्या दो करोड़ युवाओं को हर साल नौकरी दे दी ? क्या किसानों की आय दोगुनी कर दी ? क्या विदेश से इतना काला धन ले आए कि हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपए आ गए ? क्या उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर किसी तरह की एफआईआर दर्ज न होने का कानून बनाकर जनता का दिल जीता है ? या फिर चुनाव आयुक्त से एसआईआर के दम पर चुनाव जीतकर ? या फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को साइड लाइन कर ? या फिर शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र का कबाड़ा कर।
कहीं ऐसा तो नहीं है कि दिल्ली जंतर मंतर पर पर्चे लीक मामले में हुए प्रोटेस्ट में दिल्ली पुलिस से छात्रों और छात्राओं से बदसलूकी और पिटाई कराकर तो मोदी जनता का दिल जीतने की बात तो नहीं कर रहे हैं ? या फिर दिल्ली कनाट प्लेस सेंटर पार्क में तिरंगा न लहराने देने को मोदी दिल जीतना मान रहे हैं ? ऐसा तो नहीं है कि मणिपुर में दो महिलाओं की न्यूड परेड को तो मोदी दिल जीतना मान रहे हों ? हो सकता है कि मोदी बेरोजगारी कर महंगाई को चरम पर पहुंचाने को दिल जीतना मान रहे हों।
मोदी जी आपने बस इतना किया है कि पहले हिन्दू मुस्लिम के नाम पर तो अब सवर्ण, ओबीसी और दलित जनता के बीच नफरत पैदा करने का काम किया है। जनता के पैसे से देश और विदेश में मौजमस्ती की है। आप अंग्रेजी और हिटलर की हुकूमत के नक़्शे कदम पर चल रहे हैं। अपने खिलाफ उतने वाली हर आवाज को की भी हद तक जाकर दबाना चाहते हैं। पर यह बात आप भी जान लीजिये कि आज भी देश में जिंदा कौम है। जो देश को बर्बाद नहीं होने देगी। लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाए गए तंत्रों को कब्जाकर जनता का दमन नहीं करने दिया जाएगा। यदि दमन का रास्ता अपनाकर विरोध में उठने वाली आवाज दबाया जाएगा तो फिर सत्ता से उखाड़ फेंक दिया जाएगा।

