अमेरिका-इजरायल के ईरान पर जारी हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (13 मार्च) को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग आईलैंड पर हमला किया है। इसके बाद अब ये सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट (होर्मुज जलडमरूमध्य) के आईलैंड पर कब्जा करने जा रहा है। ट्रंप ने एक दिन पहले ही 2500 मरीन सैनिकों की मिडिल ईस्ट में तैनाती का आदेश दिया है।
अमेरिकी नेवी के पूर्व अधिकारी और रक्षा एक्सपर्ट मैल्कम नैंस ने इसे एक खतरनाक प्लान बताया है। उन्होंने कहा कि यह काम कम से कम 2 हफ्तों में पूरा हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी समस्या भी बताई. नैंस ने कहा कि मिडिल ईस्ट के अमेरिकी कमांडरों ने 40 साल पहले ही इस योजना का विश्लेषण किया था। मैल्कम ने बताया कि उस समय अनुमान लगाया गया था कि 6000 मरीन सैनिकों के साथ-साथ कई आईलैंड पर तैनात सभी इक्विपमेंट की आवश्यकता होगी।
क्या था प्लान
मैल्कम ने बताया कि प्लान ये था कि पहले लारक, होर्मुज और केशम आईलैंड पर कब्जा करके बंदर अब्बास को घेर लिया जाए। इसके बाद प्रतिबंधित समुद्री सीमा को तोड़कर आगे बढ़ा जाए। साथ ही ये भी बताया कि अमेरिका ने 1988 में भी इस तरह का प्लान नहीं बनाया था, जब ईरानी बारूदी सुरंगों ने अमेरिकी जहाजों को डुबोने की कोशिश की थी।
होर्मुज स्ट्रेट पर हमला अमेरिका के लिए घातक
अमेरिकी नेवी के पूर्व अधिकारी ने बताया कि इसके लिए अमेरिका ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर हमला करना होगा, लेकिन ये इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसके जवाब में IRGC और बासिज फोर्स के सैनिक पहाड़ों से बमबारी और आत्मघाती हमले करेंगे। इसके अलावा उन्होंने रसद सप्लाई की समस्या की भी बात कही। मैल्कम ने कहा कि ये सप्लाई UAE और कतर के ठिकानों से होगी, जिन पर फिर से हमला होगा और ऐसे में वो शायद इसके लिए तैयार न हों।
होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें
मिडिल ईस्ट में तैनात सेना को ईरानी पहाड़ों के सामने मिसाइलों, पनडुब्बी ड्रोन, सुसाइड बोट या बारूदी सुरंगों के बीच लॉन्च करना होगा, जिनका अमेरिका ने पता नहीं लगाया है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं, मैल्कम ने कहा कि अगर पेंटागन इटली से एक्सपेडिशनरी सी बेस जहाज को हिंद महासागर में लाता है तो होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित मंच मिल सकता है। उन्होंने इसे मूर्खतापूर्ण बताया है।

