वर्तमान में ईरान-अमेरिका तनाव (जिसे कुछ रिपोर्ट्स में युद्ध के रूप में वर्णित किया जा रहा है) के कारण होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन का रास्ता है। ईरान ने इसे आक्रामक पक्षों (मुख्यतः अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों) के लिए बंद या प्रतिबंधित कर रखा है, जबकि अन्य देशों के लिए सुरक्षा कारणों से मुश्किलें बढ़ गई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया है।
पाकिस्तानी और चीन की भूमिका
पाकिस्तान मध्यस्थता में सक्रिय है। उसने अमेरिका का 15-पॉइंट सीजफायर प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया, जिसमें शामिल हैं: सीजफायर, ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक, मिसाइल सीमाएं, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करना।
चीन और पाकिस्तान ने मिलकर 5-सूत्रीय शांति योजना पेश की है, जिसमें तत्काल सीजफायर, शांति वार्ता शुरू करना और होर्मुज में सुरक्षित नौवहन बहाल करना शामिल है।
पाकिस्तान ने ईरान से अपने 20 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति भी हासिल की है, जिसे इस्लामाबाद ने सकारात्मक कदम बताया है।
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रात भर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस, विशेष दूत स्टीव विटकोफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची से बातचीत की है। इसमें तत्काल सीजफायर और होर्मुज खोलने पर जोर है, उसके बाद पाकिस्तान में व्यापक वार्ता प्रस्तावित है।
ईरान का रुख और पेच
ईरान ने अमेरिकी 15-पॉइंट प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अपना काउंटर-प्रस्ताव रखा है। इसमें शामिल हैं:
युद्ध की क्षतिपूर्ति (reparations)
भविष्य में युद्ध न दोहराने की गारंटी
होर्मुज पर ईरान की संप्रभुता (sovereignty) की मान्यताईरान का कहना है कि वह सीजफायर के बदले होर्मुज को पूरी तरह खोलने को तैयार नहीं है, खासकर जब तक अमेरिकी/इजरायली दबाव जारी है। कुछ रिपोर्ट्स में ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित सीधी बातचीत से भी इनकार किया है या शर्तें लगाई हैं।
अमेरिकी पक्ष (ट्रंप प्रशासन)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज नहीं खुला तो ईरान की बुनियादी ढांचे (पावर प्लांट्स, ब्रिज आदि) पर हमले होंगे। उन्होंने कहा है कि सीजफायर तभी संभव जब स्ट्रेट “ओपन, फ्री एंड क्लियर” हो।
वर्तमान स्थिति (6 अप्रैल 2026 तक)
पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे मध्यस्थ 45 दिनों के सीजफायर या दो-चरणीय योजना (पहले तत्काल युद्धविराम, फिर पूर्ण वार्ता) पर काम कर रहे हैं।
होर्मुज अभी भी मुख्य अड़चन है। ईरान कहता है कि केवल “आक्रामक” जहाजों पर प्रतिबंध है, लेकिन व्यावहारिक रूप से नौवहन बुरी तरह प्रभावित है।
बातचीत के कुछ चैनल खुले हैं (टेक्स्ट मैसेज और मध्यस्थों के जरिए), लेकिन कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं हुआ है।
निष्कर्ष: पाकिस्तान सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और ईरान उसके प्रस्तावों पर विचार कर रहा है, लेकिन होर्मुज का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा पेच है। दोनों पक्ष अपनी शर्तों पर अड़े हैं—अमेरिका खुला जलडमरूमध्य चाहता है, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षतिपूर्ति पर जोर दे रहा है। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए आगे की अपडेट पर नजर रखना जरूरी है। वैश्विक तेल कीमतें और क्षेत्रीय सुरक्षा इस पर निर्भर हैं।

