राहुल गांधी ने बिहार में लालू प्रसाद और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के दबाव में न आने का दे दिया संकेत
क्या कांग्रेस ने अपने दम चुनाव लड़ने की रणनीति बना ली है ? क्या कांग्रेस क्षेत्रीय दलों से कोई समझौता नहीं करने जा रही है ? यूपी विधान परिषद चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के रुख से तो यही लग रहा है। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव में 11 सीटों में से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पांच प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। ऐसे ही बिहार में लालू प्रसाद यादव के दबाव में कांग्रेस नहीं आ रही है। लालू प्रसाद कांग्रेस को 50 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं हैं तो कांग्रेस 70 से कम पर मानने को तैयार नहीं। तो क्या गठबंधन टूट जाएगा ?
जानकारी यह मिल रही है कि कांग्रेस ने यह रणनीति बना ली है कि गठबंधन रहे या नहीं रहे पर वह क्षेत्रीय दलों से कोई समझौता नहीं करने जा रही है। ऐसे ही उत्तर प्रदेश में सपा के किसी दबाव नहीं आने का संकेत कांग्रेस ने दे दिया है। दरअसल कांग्रेस 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करके चल रही है। कांग्रेस की यह बात अच्छी तरह से समझ में आ चुकी है कि क्षेत्रीय दलों की सरकार बनवाकर उसने अपने को कमजोर किया है। चाहे बिहार हो, उत्तर प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो या फिर दिल्ली कांग्रेस ने बीजेपी को रोकने के लिए क्षेत्रीय दलों को समर्थन दिया और अपने जनाधार खो दिया। यही वजह रही कि बिहार में प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावारु और कन्हैया दोनों ही नेता तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री पद खुलकर नहीं बोले। ऐसे ही वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी भी बात को टालते रहे।
ऐसे ही उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बहुत पहले कहना शुरू कर दिया था कि कांग्रेस 2027 में अपने दम पर सरकार बनाएगी। क्षेत्रीय दल भी कांग्रेस की रणनीति को भली भांति समझ रहे हैं। यही वजह है कि पूरा विपक्ष राहुल गांधी को अपना नेता मानने को तैयार नहीं। ममता बनर्जी अलग इंडिया गठबंधन का संयोजक बनने का दंभ भरती है तो लालू प्रसाद और अखिलेश यादव ममता बनर्जी का समर्थन करते हैं। जबकि इंडिया गठबंधन का संयोजक राहुल गांधी को माना जाना चाहिए। वैसे भी राहुल गांधी प्रतिपक्ष नेता हैं।

