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होली पर मुसलमानों को लेकर पर इतना बवाल क्यों ?

चरण सिंह 

क्या इस बार पहली बार होली मनाई जा रही है ? क्या इससे पहले होली पर रमजान नहीं रहा ? क्या इससे पहले होली के दिन नमाज नहीं पढ़ी गई ? क्या हिन्दू मुस्लिम मिलकर होली का त्यौहार मनाते रहे हैं ? दरअसल हिन्दू मुसलमानों के एक साथ मिलकर होली मनाने की परम्परा हमारे देश में रही है। क्या राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और पुलिस प्रशासन के होली मिलन समारोह में मुसलमान और हिन्दू मिलकर होली नहीं खेलते।

होली को लेकर जब न हिन्दुओं कोई दिक्कत है और न ही मुस्लिमों को तो फिर नेताओं और पुलिस को क्या दिक्कत है ? क्या संभल के सीओ पुलिस और दूसरी एजेंसियों से ऊपर हो गए हैं ? क्या एसएसपी ने संभल में इस तरह के बयान देने के लिए सीओ को अधिकृत कर रखा है ?  क्या मुसलमानों ने बोला है कि उनकी नमाज की वजह से वे होली नहीं मनाने देंगे ? क्या कोई सांसद या मंत्री किसी को ऊपर पहुंचाने का अधिकार रखता है ? रखता है तो फिर इस संविधान और कानून की क्या जरूरत है ?
जिस संविधान और कानून ने मंत्री और सांसद बनाया। पुलिस अधिकारी बनाया। उससे ऊपर उठकर बयानबाजी करने का क्या मतलब ? क्या पुलिस प्रशासन का काम साम्प्रदायिक सौहार्द बनाने का नहीं है ? क्या किसी मुसलमान को हिन्दुओं के रंग खेलने पर दिक्कत है ? जिस मुसलमान को रंग नहीं खेलना वह घर से क्यों निकलेगा ? फिर इस तरह के बयान देकर माहौल गरमाने की क्या जरूरत है ? क्या पुलिस प्रशासन हिन्दू और मुसलमानों के गणमान्य लोगों को शांतिपूर्वक त्योहार मनाने के लिए बैठक नहीं करते रहा है ? जब एक व्यवस्था रही है तो फिर किसी सीओ को इस तरह के बयान की क्या जरूरत है ?  क्या ये सीओ साहब एसएसपी, डीआईजी और डीजीपी से भी बढ़कर हैं ? जिस बीजेपी में अनाप शनाप बोलने की इजाजत अच्छे अच्छे नेताओं को नहीं है। उस बीजेपी में कोई भी नेता कुछ भी बयान जारी कर दे रहा है। अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम कह रहे हैं कि जो गड़बड़ करेगा तो उस ऊपर पहुंचा दिया जाएगा। मतलब पुलिस प्रशासन कुछ नहीं कानून कुछ नहीं ये सांसद साहब कुछ भी कर सकते हैं। कौन कर रहा है माहौल ख़राब ?
एक मंत्री रघुराज सिंह कह रहे हैं कि मुसलमान अपन टोपी और शरीर को बचाने के लिए हिजाब पहन लें। मतलब क्या कोई मुसलमान कह रहा है हम पर रंग मत डालना है। वैसे भी अब जब कोई रंग नहीं डलवाना चाहता है तो कोई जबरदस्ती रंग नहीं डालता है। मुसलमान तो छोड़ दीजिये। कोई हिन्दू भी नहीं खेलना चाहता है तो उसके ऊपर भी रंग नहीं डाला जाता है।
उत्तर प्रदेश के संभल से एक सीओ का बयान बिहार तक जा पहुंचा। बीजेपी विधायक हरिभूषण बलोच ने कह दिया कि होली के दिन मुसलमान घर से न निकलें। बलोच के जवाब में प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार क्या बलोच के बाप का है। यह बिहार है। यहां साम्प्रदायिकता नहीं फ़ैलाने दी जाएगी। देश की स्थिति यह है कि कोई आम आदमी की राय नहीं जानना चाहता है। हर त्यौहार पर बस नेता सियासत करने लगते हैं। हर त्योहार और इवेंट्स में वोटबैंक की राजनीति हो रही है। ये नेता तो लोगों का  त्योहार भी ख़राब कर दे रहे हैं। अच्छे खासे माहौल को तनाव का माहौल बना देते हैं।
विपक्ष भी कहीं पीछे यही है। चंदौसी के सांसद वीरेंद्र सिंह सीओ के बारे में कह रहे हैं कि यह टुच्चा गुंडा मुख्यमंत्री ने पाला हुआ है। मतलब शांति और सौहार्द की बात किसी को नहीं करनी है। जबकि होना यह चाहिए कि पुलिस प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि यदि कोई मुसलमान या ईसाई समुदाय से कोई व्यक्ति होली खेलना चाहता है उसे होली साथ में होली खिलाई जाए। ऐसे बहुत मुसलमान और ईसाई हैं जो हिन्दुओं के साथ होली खेलना चाहते हैं। ऐसे लोगों को होली खेलने की छूट होनी चाहिए। हैं पुलिस को इस बात का ध्यान रखना होगा कि किसी तरह की बदतमीजी नहीं होनी चाहिए।
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