चरण सिंह
लोकसभा अध्यक्ष कौन बनेगा और किस पार्टी का होगा ? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए के घटक दल टीडीपी और जदयू में से किसी सांसद को लोकसभा अध्यक्ष बनने देंगे ? क्या जदयू और टीडीपी बीजेपी से होने वाले लोकसभा अध्यक्ष पर सहमत होंगे ? क्या कोई घटक दल लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए एनडीए में बगावत करेगा ? ये सभी प्रश्न राजनीतिक हलके में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
दरअसल 24 जून से 18 वीं लोकसभा का पहला सत्र शुरू हो रहा और 26 जून को लोकसभा अध्यक्ष पद का चुनाव होगा। इंडिया गठबंधन ने ऐलान कर दिया है कि यदि विपक्ष को लोकसभा उपाध्यक्ष पद नहीं दिया गया तो वह लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेगा। एनडीए के घटक दलों में जदयू ने भले ही भाजपा के निर्णय के साथ रहने की बात कही हो पर टीडीपी लोकसभा अध्यक्ष पद सभी घटक दलों की सहमति चाहती है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह घटक दलों की सहमति के बाद ही लोकसभा अध्यक्ष बनाएंगे ? क्या सभी घटक दलों की सहमति भाजपा के साथ होगी ?
दरअसल इस लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष महत्वपूर्ण रोल अदा करने जा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि गठबंधन की सरकार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने मंत्रालयों के बंटवारे में भी अपने घटक दलों को कोई खास तवज्जो नहीं दी है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान आग में घी का काम किया है। अशोक गहलोत ने कहा है कि यदि लोकसभा अध्यक्ष बीजेपी का रहा तो टीडीपी और जदयू अपने सांसदों की टूट देखने के लिए तैयार रहें।
वैसे भी प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण मंत्रालय गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय बीजेपी के पास ही रखे हैं। मतलब मंत्रालयों के बंटवारे में टीडीपी और जदयू को कोई खास तवज्जो नहीं दी। ऐसे में कहा जा सकता है कि लोकसभा अध्यक्ष तो प्रधानमंत्री किसी भी हालत में घटक दलों को नहीं देने वाले हैं। यह जमीनी हकीकत है कि छह महीने से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी भाजपा को बहुमत की स्थिति में लाना चाहेंगे।
इसमें दो राय नहीं कि न केवल बिहार बल्कि आंध्र प्रदेश को भी विशेष राज्य की दरकार है। ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू दोनों ही जल्द से जल्द विशेष राज्य का दर्जा चाहेंेगे। विशेष राज्य के दर्जे की आड़ में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सब कुछ कर लेना है। उधर इंडिया गठबंधन ने ऐलान कर दिया है कि यदि उन्हें लोकसभा उपाध्यक्ष पद न मिला तो लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा जाएगा। चुनाव लड़ने से इतना तो हो जाएगा कि विपक्ष को शक्ति प्रदर्शन करने का मौका मिल जाएगा।
राहुल गांधी को बयानबाजी करने का मौका मिल जाएगा। घटक दल भी खेल कर सकते हैं। जिस तरह से नीतीश कुमार आत्मसमर्पण की भूमिका में हैं। उसके आधार पर यह जरूर कहा जा सकता है कि टीडीपी के आंख दिखाने से कोई लाभ उन्हें नहीं होने वाला है। वैसे खबरें तो यह भी आ रही हैं कि जदयू सांसद ललन सिंह गृहमंत्री अमित शाह के संपर्क में हैं। जदयू के 10 सांसद कभी भी टूट सकते हैं। यदि ऐसा हो जाता है तो फिर जदयू का वजूद ही खत्म हो जाएगा। मार्केट में खबरें यह भी हैं कि बीजेपी आंध्र प्रदेश की अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव की बेटी डी पुरंदेश्वरी को लोकसभा अध्यक्ष बना सकती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि डी पुरंदेश्वरी चंद्रबाबू नायडू की पत्नी की बहन हैं। यह बीजेपी का बड़ा दांव हो सकता है। ऐसे में चंद्रबाबू नायडू भी उनके नाम का विरोध नहीं कर पाएंगे।
हालांकि एनडीए सरकार में घटक दलों के ही लोक सभा अध्यक्ष रहे हैं। वाजपेयी सरकार में 24 मार्च 1998 से 3 मार्च 2002 तक टीडीपी के जीएमसी बालयोगी तो 10 मई 2002 से 2 अगस्त 2004 तक शिवसेना के मनोहर जोशी लोकसभा अध्यक्ष रहे हैं। पर इस बार परिस्थिति बिल्कुल विपरीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम करने का तरीका आक्रामक है और वह लोकसभा अध्यक्ष घटक दलों में से बनवाकर किसी दबाव में नहीं आना चाहते हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि एक ओर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत लगातार नरेन्द्र मोदी की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं तो दूसरी ओर घटक दलों में जदयू और टीडीपी हैं जो किसी समय मोदी के घोर विरोधी रहे हैं।
नीतीश कुमार ने 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने का खुलकर विरोध किया था तो 2019 के लोकसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ आग उगली थी। उन्होंने गुजरात दंगों का मुद्दा उठाकर यहां तक कह दिया था कि उनके बयान के बाद ही अमेरिका ने मोदी के वीजा पर प्रतिबंध लगाया था। प्रधानमंत्री जानते हैं कि ये दोनों ही नेता मौका मिलते ही वार करने से चूकेंगे नहीं। वैसे भी इंडिया गठबंधन के सूत्रधार तो नीतीश कुमार ही थे। ऊपर से इंडिया गठबंधन भी सरकार गिराने की ताक में बैठा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तो यह भी कह चुके हैं कि मोदी सरकार कभी भी जा सकती है।







