उ.प्र. उच्च न्यायालय के 2015 के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल का फैसला लागू करो – सरकारी वेतन पाने वालों के बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ना अनिवार्य करो
सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) की प्रमुख मांगेंः
1.उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल का 2015 का फैसला कि सरकारी तनख्वाह, लाभ पाने वालों के बच्चे अनिवार्य रूप से सराकरी विद्यालय में पढ़ें, को लागू करो।
2.निजी शिक्षण संस्थनों का राष्ट्रीयकरण करो।
3.शैक्षणिक संस्थानों में मूल्यांकन हेतु परीक्षा समाप्त कर शिक्षकों द्वारा गुणात्मक मूल्यांकन हो।
4.उच्च शिक्षा के मौके सभी को अपनी रुचि के अनुसार बिना किसी प्रवेश परीक्षा के मिलें।
5.सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाला ही चुनाव लड़ सके व उसे ही सरकारी नौकरी मिले। यदि कोई सरकारी व्यवस्था में काम करना चाहता है तो उसे सरकारी व्यवस्था में भरोसा तो होना चाहिए।
6.सरकारी विद्यालयों को बंद कराना रोका जाए। एक बच्चा भी रहे तो उसके लिए विद्यालय चलना चाहिए क्योंकि शिक्षा बच्चे का मौलिक अधिकार है।
7.निजी कोचिंग संस्थानों पर प्रतिबंध लगे।
8.शिक्षा के निजीकरण, बाजारीकरण, साम्प्रदायिकीकरण व केन्द्रीकरण (राज्यों का हक छीनना) पर रोक लगे।
9.स्वास्थ्य, खेती, कपड़ा, मकान, यातायात व दूरसंचार क्षेत्रों में भी मुनाफा कमाने पर रोक लगे।
10.शैक्षणिक संस्थानों में अभिव्यक्ति की आजादी, आस्था, संगठन बनाने की आजादी सुनिश्चित हों।
11.प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक गरीब, बहुजन, लड़कियों व जरूरतमंद बच्चों के लिए छात्रवृति व छात्रावास की व्यवस्था होनी चाहिए।
12.वार्ड स्तर पर निशुल्क पुस्तकालय जहां किताबों, कम्प्यूटर, इंटरनेट, बैठने की जगह, पानी, शौचालय, आदि की व्यवस्था हो।
13.प्रत्येक वार्ड स्तर पर एक निशुल्क खेलकूद स्थल हो जहां लड़के-लड़कियों के लिए जो वे चाहें सभी खेलों की सुविधा उपलब्ध हो।
14.रोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाए।
15.डाॅ लोहिया का सिद्धांत कि अमीर-गरीब की आय के बीच दस गुना से ज्यादा का अंतर न हो को लागू किया जाए।
16.पूर्ण शराबबंदी लागू हो।
17.लखनऊ स्थित राज्यपाल के निवास को सिविल अस्पताल के साथ जोड़कर एक नया चिकित्सा विश्वविद्यालय खोला जाए। राज्यपाल छोटे घर में रह सकती हैं।
18.इसी तरह हाल में दुबग्गा, लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल बनाया गया। वहां इतनी जगह है कि एक शैक्षणिक संस्थान वहां बनाया जा सकता है। इसी तरह रेलवे, सेना के पास अतिरिक्त भूमि को लेकर, नेताओं व अधिकारियों के बड़े-बड़े घरों का अधिग्रहण कर उनमें अतिरिक्त शैक्षणिक संस्थान खोले जा सकते हैं ताकि सभी बच्चे अपनी इच्छा अनुसार शिक्षा प्राप्त कर सकें।

