नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जब पाकिस्तान के खिलाफ भारत की कार्रवाई और आतंकवाद पर नीति बता रहे थे, तब विपक्ष ने हंगामा शुरू किया। शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें भारत के विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं, बल्कि पाकिस्तान पर भरोसा है, और इसीलिए वे “20 साल तक विपक्ष में ही बैठे रहेंगे।”
विपक्ष की भड़कने की वजह:
आरोप का स्वर: शाह का बयान सीधे विपक्ष, खासकर कांग्रेस, पर देश विरोधी ताकतों के साथ जुड़े होने का आरोप लगाता था। यह विपक्ष के लिए अपमानजनक और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने वाला था।
पाकिस्तान से जोड़ना: शाह ने कांग्रेस को पाकिस्तान के साथ जोड़कर उनकी मंशा पर सवाल उठाया, जो विपक्ष को संवेदनशील और आपत्तिजनक लगा, खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की थी।
संसदीय माहौल: चर्चा पहले से ही तीखी थी, और विपक्ष बिहार में मतदाता सूची और पहलगाम हमले जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहा था। शाह का यह तंज हंगामे को और बढ़ाने वाला साबित हुआ।
विपक्ष ने इसे सरकार की ओर से बहस को व्यक्तिगत और अपमानजनक बनाने की कोशिश माना, जिससे हंगामा बढ़ गया। शाह के बयान का मकसद विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में लाना था, लेकिन इसने सदन में तनाव को और गहरा कर दिया।

