जिंदा इंसान का दिमाग दो हिस्सों में काटने की प्रक्रिया को कॉरपस कॉलोसोटॉमी (Corpus Callosotomy) कहा जाता है। यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें मस्तिष्क के दो गोलार्धों (हेमिस्फीयर) को जोड़ने वाली तंत्रिका तंतुओं की संरचना, जिसे कॉर्पस कॉलोसम कहते हैं, को काटा जाता है। यह सर्जरी मुख्य रूप से उन मरीजों पर की जाती थी जिन्हें गंभीर मिर्गी (epilepsy) के दौरे पड़ते थे, ताकि दौरे एक गोलार्ध से दूसरे में न फैलें।
क्या होता है जब दिमाग दो हिस्सों में काटा जाता है?
स्प्लिट-ब्रेन सिंड्रोम: कॉर्पस कॉलोसम के कटने से मस्तिष्क के बाएँ और दाएँ गोलार्धों के बीच संचार कम हो जाता है। इससे दोनों गोलार्ध स्वतंत्र रूप से काम करने लगते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुछ अजीब व्यवहार देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए:
बाएँ गोलार्ध (Left Hemisphere): यह भाषा, तार्किक सोच, और विश्लेषणात्मक कार्यों में विशेषज्ञ होता है।
दाएँ गोलार्ध (Right Hemisphere): यह स्थानिक समझ, चेहरों की पहचान, भावनाएँ, और रचनात्मकता से जुड़ा होता है।
अगर कोई वस्तु केवल दाएँ गोलार्ध को दिखाई दे, तो मरीज उसे बोलकर नहीं बता सकता (क्योंकि भाषा का नियंत्रण बाएँ गोलार्ध में होता है), लेकिन वह उस वस्तु को चित्रित कर सकता है।
अजीब व्यवहार: कुछ मरीजों में “एलियन हँड सिंड्रोम” जैसे लक्षण देखे गए, जहाँ एक हाथ बिना मरीज के नियंत्रण के स्वतंत्र रूप से काम करता है। उदाहरण के लिए, एक मरीज का दायाँ हाथ कुछ उठा सकता है, जबकि बायाँ हाथ उसे रोकने की कोशिश करता है।
जीवन पर प्रभाव: सामान्य जीवन में मरीज सामान्य रूप से कार्य कर सकते हैं, क्योंकि मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में अधिकांश कार्यक्षमता बरकरार रहती है। हालांकि, विशेष टेस्ट में उनके व्यवहार में असामान्यताएँ दिखती हैं। बुद्धि, व्यक्तित्व, और भावनाएँ आमतौर पर प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन जटिल कार्यों में कठिनाई हो सकती है।
1960 के प्रयोग: रोजर स्पेरी और माइकल गजानिगा
1960 के दशक में, रोजर स्पेरी और माइकल गजानिगा ने “स्प्लिट-ब्रेन” मरीजों पर अध्ययन किया। ये प्रयोग मिर्गी के मरीजों पर किए गए, जिनके कॉर्पस कॉलोसम को सर्जरी द्वारा काटा गया था। इन प्रयोगों ने मस्तिष्क के गोलार्धों की विशेषज्ञता (lateralization) को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कुछ प्रमुख निष्कर्ष:
दोनों गोलार्ध अलग-अलग तरह से जानकारी को प्रोसेस करते हैं।
बायाँ गोलार्ध भाषा और बोलने में माहिर है, जबकि दायाँ गोलार्ध दृश्य और स्थानिक जानकारी में बेहतर है।
इन अध्ययनों से यह भी पता चला कि चेतना (consciousness) का स्वरूप जटिल है, और दोनों गोलार्ध अलग-अलग तरह से दुनिया को देख सकते हैं।
स्पेरी को इस काम के लिए 1981 में नोबेल पुरस्कार (फिजियोलॉजी या मेडिसिन) मिला।
‘नैतिक और वैज्ञानिक महत्व
ये प्रयोग आज के समय में अत्यधिक नैतिक जांच के अधीन हैं, क्योंकि मस्तिष्क पर इस तरह की सर्जरी जोखिम भरी होती है। आज कॉर्पस कॉलोसोटॉमी बहुत कम मामलों में की जाती है, और इसे अंतिम उपाय के रूप में देखा जाता है। इन प्रयोगों ने मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, चेतना, और न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान की।
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