चरण सिंह
बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ जो अत्याचार किया जा रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। जानकारी मिल रही है कि शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों की संख्या लगातार बढ़ी है। कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को जिस तरह से भीड़ के हवाले किया गया, जिस तरह से भीड़ ने बेरहमी पीट पीटकर मार डाला और पेड़ से लटका दिया। उसके विरोध में भारत में जगह जगह धरना-प्रदर्शन चल रहे हैं पर सरकार मूकदर्शक की भूमिका में है।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब बांग्लादेश के हिन्दू के साथ हो रहे अत्याचार को देखकर भारत के हिन्दू संगठनों में तो उबाल आ रहा है पर हिन्दू और हिन्दू संगठनों के दम पर बनी सरकार क्या कर रही है ? बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की रक्षा क्यों नहीं की जा रही है ? जब सरकार मुस्लिम समुदाय से आने वाली पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण दे सकती है तो फिर बांग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं के लिए कुछ क्यों नहीं कर रही है ?
तो क्या यह माना जाए कि बीजेपी को हिन्दुओं से कुछ लेना देना नहीं है बल्कि हिंदुओं के नाम पर सत्ता के लिए भारत के हिन्दुओं को साधना है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर जब हिन्दू संगठन उबल रहे हैं तो फिर सरकार क्यों शांत है। एक साल से क्या सरकार मूकदर्शक की भूमिका निभा रही है।
दरअसल बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के अनुसार अगस्त 2024 से जुलाई 2025 तक हिंदुओं के साथ 2,442 घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में मंदिरों पर हमले, घर जलाना, लूटपाट और हत्याएं शामिल हैं। ये घटनाएं मुख्य रूप से राजनीतिक अस्थिरता, बदले की भावना और कभी-कभी कथित ईशनिंदा (ब्लास्फेमी) के आरोपों से जुड़ी हैं।
गत 18 दिसंबर को मायमन सिंह जिले में एक हिंदू गारमेंट फैक्ट्री वर्कर दीपू चंद्र दास को सहकर्मियों ने ईशनिंदा का आरोप लगाकर भीड़ के हवाले कर दिया। भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला, पेड़ से लटकाया और शव जला दिया। सरकार ने क्या किया ? 2024-2025 में कई हिंदू युवकों पर ब्लास्फेमी के झूठे आरोप लगाकर हमले या लिंचिंग की कोशिशें हुईं हैं।

