चरण सिंह
वैसे तो पश्चिमी बंगाल में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर है पर कोलकाता आरजी कर मेडिकल कालेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या मामले के बाद सूबे की मुखिया ममता बनर्जी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। न केवल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वतज् संज्ञान लेकर ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई है बल्कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी ने भी कह दिया है कि अब बहुत हो गया वह बहुत निराश और भयभीत हैं। केंद्र सरकार ने तो पहले से सीबीआई जांच बैठा दी है। ऐसे में पश्चिमी बंगाल में राष्ट्रपति शासन लग जाए तो किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। कोलकाता रेप और हत्याकांड ममता बनर्जी के गले की हड्डी बन चुकी है। इस मामले में ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगे हैं। जिस मेडिकल कॉलेज में यह कांड हुआ उसका प्रिंसिपल संदीप घोष सीनियर डॉक्टरों के साथ बैठकर शराब पीता था। रेप और हत्याकांड के बाद प्रिंसिपल का प्रमोशन के साथ ट्रांसफर कर दिया गया। डॉक्टरों के आंदोलन के बीच में अस्पताल पर हजारों की संख्या में लोगों ने अस्पताल पर हमला कर दिया। यह हमला सरकार का प्रायोजित हमला बताया जा रहा है। यह माना जा रहा है कि ममता सरकार गुंडई के बल पर आंदोलन को तुड़वाने में लग गई थीं। बताया जाता है कि संदीप घोष सरकर को मोटा पैसा कमाकर दे रहा था। सुप्रीम कोर्ट की लताड़ और राष्ट्रपति का चिंता जताना यह दर्शाता है कि पश्चिम बंगाल में कुछ बड़ा होने जा रहा है।
दरअसल सत्ता के मद में ममता बनर्जी यह भी भूल बैठी हैं कि उनके सूबे में जो अपराध हो रहा है उसे संरक्षण देना उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। शारदा और सहारा जैसी तमाम चिटफंड कंपनियां पश्चिम बंगाल में फलती फूलती रहीं। टीएमसी के नेता पश्चिमी बंगाल में अराजकता फैलाते रहे बहू़-बेटियों की अस्मिता से खेला जाता रहा पर ममता बनर्जी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बल्कि जब विपक्ष ने इस ओर उनका ध्यान आकृष्ट करना चाहा तो उन्होंने किसी की बात को गंभीरता से नहीं लिया। ममता बनर्जी बीजेपी से लोगों की नाराजगी को भुनाते रहीं पर उन्हें यह ध्यान नहीं रहा कि पश्चिम बंगाल में तो उनकी ही सरकार है। ममता बनर्जी विरोध की आवाज को दबाने के मामले में मोदी सरकार से भी आगे निकल गईं।
बताया जा रहा है कि आरोपी संजय राय की गाड़ी कमिश्नर के नाम है। ममता बनर्जी डॉक्टरों के आंदोलन में शामिल होकर क्या साबित करना चाह रही थीं ? मुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्री पद भी तो उन्हीं के पास है। क्या सरकार को इस ओर ध्यान नहीं देना चाहिए था ? ममता सरकार लगातार आरोपियों को बचाती रहीं। दरअसल पश्चिम बंगाल की स्थिति बहुत बिगड़ चुकी है। ममता बनर्जी वोटबैंक के लालच में मुस्लिमों को कुछ ज्यादा ही छूट दे रही हैं। पश्चिम बंगाल में भी हिन्दुओं के साथ अत्याचार होने के मामले समय समय पर आते रहते हैं। ममता बनर्जी और विपक्ष के दूसरे नेताओं को यह भी समझ लेना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद विपक्ष पर एक दबाव बनना शुरू हो जाएगा।
राष्ट्रपति शासन की ओर पश्चिम बंगाल!

